क्या विक्रम पर नियंत्रण खोने के बाद चंद्रमा पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया चंद्रयान?

विक्रम दो सितंबर को आर्बिटर से अलग हो गया था. चंद्रयान-2 को इसके पहले 22 जुलाई को भारत के GSLV MK 3 के जरिए अंतरिक्ष में लांच किया गया था.

क्या भारत का पहला मून लैंडर विक्रम चंद्रमा की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया और इसके कारण चंद्रयान-2 ऑर्बिटर से उसका संपर्क टूट गया? शनिवार तड़के लगभग 1 बजकर 38 मिनट पर जब 30 किलोमीटर की ऊंचाई से 1,680 मीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से 1,471 किलोग्राम का विक्रम चंद्रमा की सतह की ओर बढ़ना शुरू किया, तब सबकुछ ठीक था.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष के. सिवन ने संपर्क टूटने की घोषणा करते हुए कहा कि चंद्रमा की सतह से 2.1 किमी पहले तक लैंडर का प्रदर्शन योजना के अनुरूप था. उन्होंने कहा कि उसके बाद उसका संपर्क टूट गया.

ISRO ने एक आधिकारिक बयान में कहा, “यह मिशन कंट्रोल सेंटर है. विक्रम लैंडर योजना अनुरूप उतर रहा था और गंतव्य से 2.1 किलोमीटर पहले तक उसका प्रदर्शन सामान्य था. उसके बाद लैंडर का संपर्क जमीन पर स्थित केंद्र से टूट गया. डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है.” इसरो के टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क केंद्र के स्क्रीन पर देखा गया कि विक्रम अपने निर्धारित पथ से थोड़ा हट गया और उसके बाद संपर्क टूट गया.

लैंडर बड़े ही आराम से नीचे उतर रहा था, और इसरो के अधिकारी नियमित अंतराल पर खुशी जाहिर कर रहे थे. लैंडर ने सफलतापूर्वक अपना रफ ब्रेक्रिंग स्टेज को पूरा किया और यह अच्छी गति से सतह की ओर बढ़ रहा था.

आखिर अंतिम क्षण में ऐसा क्या हो गया?

ISRO के एक वैज्ञानिक के अनुसार, लैंडर का नियंत्रण उस समय खत्म हो गया होगा, जब नीचे उतरते समय उसके थ्रस्टर्स को बंद किया गया होगा और वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया होगा, जिसके कारण संपर्क टूट गया. हालांकि 978 करोड़ रुपए की लागत वाले चंद्रयान-2 मिशन का सबकुछ समाप्त नहीं हुआ है.

ISRO के एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने के अनुरोध के साथ बताया, “मिशन का सिर्फ पांच प्रतिशत-लैंडर विक्रम और प्रज्ञान रोवर- नुकसान हुआ है, जबकि बाकी 95 प्रतिशत -चंद्रयान-2 ऑर्बिटर- अभी भी चंद्रमा का सफलतापूर्वक चक्कर काट रहा है.” एक साल मिशन अवधि वाला ऑर्बिटर चंद्रमा की कई तस्वीरें लेकर इसरो को भेज सकता है.

अधिकारी ने कहा कि ऑर्बिटर लैंडर की तस्वीरें भी लेकर भेज सकता है, जिससे उसकी स्थिति के बारे में पता चल सकता है. चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान में तीन खंड हैं -ऑर्बिटर (2,379 किलोग्राम, आठ पेलोड), विक्रम (1,471 किलोग्राम, चार पेलोट) और प्रज्ञान (27 किलोग्राम, दो पेलोड).

विक्रम दो सितंबर को आर्बिटर से अलग हो गया था. चंद्रयान-2 को इसके पहले 22 जुलाई को भारत के हेवी रॉकेट जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हिकल-मार्क 3 (जीएसएलवी एमके 3) के जरिए अंतरिक्ष में लांच किया गया था.

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