5 साल पहले कांग्रेस के जिस घोषणापत्र को जनता ने नकारा, उससे कितना अलग है 2019 का वचन पत्र?

दो बार लगातार सरकार में रहने के बाद जनता ने 2014 में कांग्रेस को नकार दिया. उस साल कांग्रेस ने जो घोषणापत्र जारी किया उससे कितना अलग है कांग्रेस का ताज़ा वचनपत्र, जानिए.

दिल्ली. कांग्रेस ने साल 2019 के लिए चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है. घोषणापत्र पर लिखा है- ‘हम निभाएंगे’. ज़ाहिर है, कांग्रेस का निशाना मुख्य तौर पर बीजेपी है. कांग्रेस का अनवरत आरोप रहा है कि बीजेपी ने अपने वादे नहीं निभाए और जनता से झूठ बोला. अब इसे ही मुद्दा बनाकर कांग्रेस अपने घोषणापत्र ‘जन आवाज़’  को तैयार कर लोगों के सामने आई है.

ध्यान से देखें तो कांग्रेस का 2014 चुनावी घोषणापत्र और 2019 का वचनपत्र एक-दूसरे से काफी अलग हैं. इस बार पार्टी ने बड़े वादों से गुरेज़ किया और धरातल से जुड़ी घोषणाएं करके खुद को ज़मीनी सिद्ध करने की कोशिश की.

मसलन साल 2014 में कांग्रेस जिस जीएसटी और डायरेक्ट टैक्स कोड के बूते 8% विकास दर बढ़ाने की बात कर रही थी वो अब नदारद है. जीएसटी राहुल गांधी के लिए गब्बर सिंह टैक्स बन चुका है. उनका ज़्यादा ज़ोर मोदी के 15 लाख के वादे के मुकाबले गरीब परिवारों को 72 हज़ार रुपए सालाना मुहैया कराने पर है. उन्होंने घोषणापत्र पेश करने के मौके पर कहा कि हमारा वादा ‘72 हज़ार गरीबी पर वार’ है.

इसी तरह साल 2014 में भी नौकरियां बड़ा मुद्दा था. बीजेपी ने तो बड़े वादे किए ही थे लेकिन कांग्रेस ने भी जॉब्स एजेंडा के माध्यम से 10 करोड़ नए मौके पैदा करने की बात कही थीं. इस बार कांग्रेस ने करोड़ों का आंकड़ा नहीं बांचा बल्कि कहा कि खाली पड़े 22 लाख सरकारी पदों को भरा जाएगा. ग्राम पंचायतों में 10 लाख युवाओं को नौकरी का वादा भी राहुल ने किया. स्टार्टअप्स शुरू करने वालों को भी कांग्रेस राहत देने का आश्वासन दे रही है. राहुल गांधी ने कहा है कि शुरूआती तीन साल में स्टार्टअप खोलनेवालों को किसी इजाजत की ज़रूरत नहीं पड़ेगी. मनरेगा के तहत सौ दिन की रोज़गार गारंटी को बढ़ाकर डेढ़ सौ दिन कर दिया गया है.

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किसानों को लेकर भी चुनाव हारे-जीते गए हैं तो इस बार भी उन्हें नज़रअंदाज़ किया नहीं जा सकता था. कांग्रेस ने हालिया विधानसभा चुनावों में सरकार बनाकर कई राज्यों में किसानों का कर्ज़माफ किया है. पहले भी वो इस कार्ड का इस्तेमाल बखूबी करती रही है. साल 2014 में कांग्रेस ने कम ब्याज़ में कर्ज़ देने का वादा भी किया था लेकिन इस बार राहुल गांधी एक कदम आगे बढ़ गए. उन्होंने कहा कि सरकार आई तो किसानों के लिए अलग से बजट लाया जाएगा. वहीं अगर अब किसान अपना कर्ज़ ना चुका पाएं तो उन पर क्रिमिनल ऑफेंस का मामला दर्ज नहीं होगा बल्कि इसे सिविल ऑफेंस समझा जाएगा.

सेहत पर कांग्रेस ने बड़ा ही सीधा सादा वादा किया है. गरीब से गरीब इंसान को उच्च क्वालिटी का इलाज देने की घोषणा की गई है. पिछली बार प्रत्येक नागरिक को स्वास्थ्य के अधिकार का वादा तो किया ही गया था, जीडीपी का 3 फीसद स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं पर खर्च करने का वचन भी दिया गया था.

शिक्षा की बात करें तो कांग्रेस के पुराने घोषणापत्र में शिक्षा और खेल पर विशेष ध्यान देने का वादा किया गया था. इस बार बजट के 6 फीसदी को शिक्षा पर खर्च करने का वचन दिया गया है. तमाम बड़े शिक्षण संस्थानों पर ज़्यादा पैचा खर्च किया जाएगा ताकि देश के हर हिस्से से छात्र यहां तक पहुंच सकें.

आजकल राष्ट्रीय सुरक्षा का चारों तरफ शोर है लेकिन राहुल गांधी शायद नैरेटिव बदलना नहीं चाहते. उन्होंने आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के लिए पुलिस और सुरक्षाबलों की भर्ती के पुराने वादे की जगह इस बार इतना ही कहा कि हम इस पर फोकस करेंगे.

कांग्रेस अध्यक्ष जब ये कहते हैं कि 2019 का घोषणापत्र बंद कमरे में तैयार नहीं हुआ बल्कि लोगों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है तो समझ लेना चाहिए कि दरअसल वो अपने घोषणापत्र को ज़मीनी दिखाने की कोशिश में हैं.