Lockdown में लौटा जीवन में अनुशासन, ‘आपातकाल में सृजन फुलवारी’ ई-बुक लॉन्च

कपिल ने अपनी रचनाओं से यह दिखाने का प्रयास किया है कि आपातकाल एक संजीवनी की तरह आई हैं, जीवन शैली में अनुशासन का लौटना संभव हो पाया है. सृजनात्मकता का विस्तार होता चला जा रहा है.
Discipline returned to life in lockdown, Lockdown में लौटा जीवन में अनुशासन, ‘आपातकाल में सृजन फुलवारी’ ई-बुक लॉन्च

‘हिसाब किताब का जवाब नहीं होता,
अंक पाकर फिर हिसाब नहीं है होता,
यह जिंदगी उतार चढ़ाव से बनी हैं मानुष,
रास्ता खुद को तय करना पड़ता हैं,
प्रयासों के अतिरिक्त कोई और रास्ता नहीं होता.’
– मुसाफिर का सफ़र

इन्हीं रचनाओं को भारतीय रेल यातायात सेवा के अधिकारी शैलेंद्र कपिल ने अपनी किताब आपातकाल में सृजन फुलवारी में पिरोया हैं. किताब की ई बुक अंतरा शब्द शक्ति डॉट कॉम पर लॉन्च की गई हैं. अंतरा शब्द शक्ति प्रकाशन, वारासिवनी, मध्य प्रदेश द्वारा उनकी किताब का प्रकाशन करते हुए ई बुक लॉन्च किया गया है.

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कपिल ने अपनी रचनाओं से यह दिखाने का प्रयास किया है कि आपातकाल एक संजीवनी की तरह आई हैं, जीवन शैली में अनुशासन का लौटना संभव हो पाया है. सृजनात्मकता का विस्तार होता चला जा रहा है. किताब में 16 कृतियों मुसाफिर का सफ़र, पंजाब देश दा मान हैं, विशाल संकल्प होते रहेंगे, आ अब लौट चलें, अपना कर्तव्य निभाएं, निस्तब्धता की घड़ी, सोचो जरा, कविता व्याकरण, चुनौतियां बेबुनियाद हैं, मन को समझाये, बढ़े चलो बढ़े चलो, हम जागेंगे, बदलते परिवेश, अभिप्राय, प्रशासनिक कविता, शब्दशक्ति में कोरोना काल को उकेरते हुए सकरात्मकता पर बल दिया गया हैं.

लेखन

किताब के लॉन्च होने पर शैलेंद्र कपिल को साहित्यिक जगत से बधाई दी गई हैं. इससे पूर्व शैलेन्द्र कपिल द्वारा हर पत्थर हीरा हैं, कल नई सुबह होगी, फिर कुछ कर दिखाना होगा, हमसफ़र के साथ, शैलेंद्र कपिल के सौ शेर कृति लिखी जा चुकी हैं. इसके अलावा उन्होंने यात्रा दर्पण, रेल संगम, गुफ़्तगू, मधुभाषिका, मानक रश्मि, रेल रजिनी, रेल वाणी, भारतीय रेल जैसी पत्रिकाओं में भी लिखा है.

सम्मान

कपिल की पहली पुस्तक हर पत्थर हीरा हैं को रेल मंत्रालय के मैथिली शरण गुप्त पुरस्कार 2011 और हिंदुस्तानी एकेडमी प्रयागराज के 2015 के पुरस्कार से नवाजा जा चुका है. इटावा हिंदी सेवा निधि के 24वें सारस्वत समारोह 2016 और सेठ गोविंददास शासन प्रशासन हिंदी सेवा सम्मान, आकाशवाणी से भी वह दस बार सम्मान से नवाजे जा चुके है.

परिचय

भारतीय रेल यातायात सेवा 1987 बैच के अधिकारी शैलेंद्र कपिल उत्तर मध्य रेलवे जोन प्रयागराज में विभिन्न पदों पर रह चुके हैं. सेवा में रहते हुए उन्होंने 95 प्रतिशत से अधिक कार्य हिंदी राजभाषा में ही किया है. रेलवे के विभिन्न इंस्टीट्यूट में ट्रेनी अफसरों को वह पढ़ा भी चुके हैं. इस समय कपिल पूर्व तटीय रेलवे जोन भुवनेश्वर में मुख्य यात्री परिवहन प्रबंधक के पद पर तैनात हैं.

पुस्तक में क्या है

लॉकडाउन में रेलवे की इमरजेंसी सेवाओं का बेहतरीन संचालन करते हुए वह अपनी कृतियों को भी साहित्यिक जगत में प्रस्तुत कर रहे हैं. आपातकाल में सृजन फुलवारी ई बुक में कोरोना कॉल की महामारी में अनुशासित जीवन, सीमित संसाधन के प्रयोग और नकारात्मक विचारों से बाहर आकर खुद को रचनात्मक बनाकर महामारी से पार होने के लिए प्रेरित किया गया है.

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