कश्मीरी पंडितों की सरकार से अपील- 10 जिलों के बजाय एक ही जगह पर बसाया जाए

जम्मू कश्मीर विचार मंच (JKVM) के अध्यक्ष ने कहा कि हालांकि अब तक 1,800 से ज्यादा कश्मीरी पंडितों (Kashmiri Pandits) को आतंकवादियों ने मार दिया है, लेकिन एक भी दोषी नहीं ठहराया गया है. उन्होंने राज्य की खराब न्याय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए.

विस्थापित कश्मीरी पंडितों (Kashmiri Pandits) के प्रमुख संगठनों ने केंद्र सरकार से कश्मीर घाटी में 10 जिलों के बजाय एक ही स्थान पर निर्वासित समुदाय की वापसी और उनकी मांग पर विचार करने की अपील की है. रूट्स इन कश्मीर (RIK), JKVM और यूथ फॉर पनुन कश्मीर (Y4PK) जैसे प्रमुख कश्मीरी पंडित संगठनों के संयुक्त रूप से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि मीडिया रिपोर्टों ने संकेत दिए हैं कि सरकार कश्मीर के अलग-अलग जिलों में कश्मीरी पंडितों को बसाए जाने की योजना बना रही है.

संगठनों ने सरकार से घाटी में कश्मीरी पंडितों के लिए 10-जिला निपटान योजनाओं पर विचार नहीं करने की अपील की और समुदाय की सम्मानजनक वापसी के लिए ‘न्याय और एक स्थान निपटान’ की मांग की. RIK के प्रवक्ता अमित रैना (Amit Raina) ने कहा कि संगठनों का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) से मिलकर सभी की मांगों को लेकर एक ज्ञापन (मेमोरेंडम) पेश करेगा.

पलायन की वजह पहचानने की मांग

केंद्र की आलोचना करते हुए रैना ने कहा कि सरकार कश्मीरी पंडितों के पलायन की वजहों को पहचानने में असफल रही है. उन्होंने कहा, “अलग-अलग जिलों में उनके पुनर्वास (Rehabilitation) के लिए योजनाओं को तैयार करने की बजाय, उन्हें पहले पलायन के कारणों को तैयार करने के लिए एक समिति का गठन करना चाहिए और फिर समिति के नतीजों के आधार पर योजना तैयार करनी चाहिए.”

न्याय के बिना वापसी संभव नहीं

जम्मू कश्मीर विचार मंच (JKVM) के अध्यक्ष दिलीप मट्टो (Dilip Matto) ने कहा कि हालांकि अब तक 1,800 से ज्यादा कश्मीरी पंडितों को आतंकवादियों ने मार दिया है, लेकिन एक भी दोषी नहीं ठहराया गया है. उन्होंने राज्य की खराब न्याय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि न्याय और एक ही जगह पर उन्हें बसाए जाने के बिना कश्मीरी पंडितों की वापसी संभव नहीं है.

इसके साथ ही Y4PK के राष्ट्रीय समन्वयक विट्ठल चौधरी (Vitthal Chaudhary) ने BJP सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 1990 में कश्मीरी पंडितों का उत्पीड़न जनसंहार से कम नहीं था. उन्होंने कहा, “सरकार नरसंहार पीड़ितों की चिंताओं को दूर करने के बजाय हमसे उन मवेशियों की तरह व्यवहार कर रही है, जिन्हें किसी भी स्थान पर ले जाया जा सकता है.”

सरकार से इन मांगों को पूरा करने की अपील

अखिल भारतीय कश्मीरी समाज (AIKS) के पूर्व उपाध्यक्ष संजय सप्रू (Sanjay Sapru) ने कहा कि सरकार को समुदाय की मांगों को ध्यान में रखना चाहिए और उन्हें एक ही जगह पर बसाया जाना चाहिए. सभी संगठनों ने सर्वसम्मति से नरसंहार के कारणों की पहचान करने और जल्द न्याय के लिए विशेष जांच दल या न्यायाधिकरण को तैयार करने की मांग की है.

इसके अलावा उन्होंने मांग की कि सरकार मंदिरों और कश्मीर में हिंदुओं की धार्मिक और सांस्कृतिक संपत्तियों की रक्षा के लिए प्रस्तावित मंदिर और तीर्थ विधेयक के अनुसार एक ‘मंदिर और तीर्थ संरक्षण अध्यादेश’ जारी करे. मालूम हो कि 1990 में पाकिस्तान के समर्थित आतंकवादियों ने कश्मीर के मूल निवासी करीब तीन लाख कश्मीरी पंडितों को उनकी मातृभूमि से बाहर निकाल दिया था.

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