मनी लॉन्ड्रिंग केस: डीके शिवकुमार के वकील बोले- 21वां खाता ED दिखा दे तो मैं दलीलें बंद कर दूंगा

शनिवार को डीके शिवकुमार की जमानत याचिका पर बहस पूरी हो गई है लेकिन राउज एवेन्यू कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है.

कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार की जमानत याचिका पर शनिवार को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई हुई. मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी शिवकुमार 14 दिन की न्यायिक हिरासत में चल रहे हैं.

आज सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) नटराजन ने कहा ‘जांच में शिवकुमार ने सहयोग नहीं किया. आर्टिकल 21 में राइट ऑफ साइलेंट है लेकिन इस तरह की गंभीर जांच में राइट ऑफ साइलेंस नहीं हो सकता. हमें 8 से 10 घंटे पूछताछ करनी थी. लेकिन डीके शिवकुमार ने सिर्फ 4 घंटे ही पूछताछ के लिये मौजूद रहे. बाकी रेस्ट मांग लेते थे.’

‘बड़े पैमाने पर एग्रीकल्चर लैंड’

ASG नटराजन ने कहा, ‘पूछताछ के दौरान जवाब सही नहीं दे रहे थे. कुछ प्रॉपर्टी के बारे में पता चला है. बड़े पैमाने पर एग्रीकल्चर लैंड है. अभी भी पैसै के लॉन्ड्रिंग की जाच चल रही है. भाई के पास 27 प्रॉपर्टी का पता चला है जिसमें 4 को नकद पैसे से खरीदा गया है. जांच बहुत की क्रूशियल स्टेज पर है.’

‘800 करोड़ रुपये से अधिक की प्रॉपर्टी’

ED की ओर से दलील दी गई शिवकुमार की समाज में गहरी पकड़ है. वो नेता हैं सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं. जांच के दौरान ईडी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज सीज किए है. हमें मामले को उसके तार्किक अंत तक ले जाने की जरूरत है. 800 करोड़ रुपये से अधिक की प्रॉपर्टी हो सकती है.

‘यह एक गंभीर आर्थिक अपराध’

उन्होंने कहा, हमारे पास डीके शिवकुमार के खिलाफ ठोस सबूत हैं. यह एक गंभीर आर्थिक अपराध है. यह अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है. ऐसे अपराध अर्थव्यवस्था को असंतुलित कर सकते है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते है. ऐसे अपराधों को कड़ाई से निपटने की जरूरत है.

’10 घंटे तक लगातार पूछताछ’

डीके शिवकुमार की जमानत पर सुनवाई के दौरान शिवकुमार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि 18 दिन तक लगातार हिरासत में लेकर 10 घंटे तक लगातार पूछताछ की गई. जांच के इस स्टेज में छेड़छाड़ का आरोप लगना गलत है.

शिवकुमार के वकील ने कहा ईडी जो गंभीर आरोप लगा रही है. ट्रिपल टेस्ट का टेंपरिंग कर सकते हैं, राष्ट्र के लिये खतरा है. पहले आप अपराध साबित करिये फिर ऐसी बातें कहिये. पिछले 22 दिनों से हर रोज 9 घंटे पूछताछ हो रही है. अगर मैं पूछताछ में इनके कहे के मुताबिक अपना गुनाह नहीं कबूल रहा तो ये आरोप लगा रहे है कि मैं सवालो से बच रहा हूं.

‘कौन से दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़’

सिंघवी ने दलील दी कि ईडी के अधिकारी बार-बार बड़ी रकम के बरामद होने का खुलासा कर रहे है. लेकिन इसे साबित करने के लिए दस्तावेज सबूत कहाँ है. हर दिन ईडी के अधिकारी रकम को बढ़ाते रहते है. उन्होंने कहा अब आखिर कौन से दस्तावेजों के साथ मैं छेड़छाड़ कर सकता है.

सारे दस्तावेज तो ईडी के कब्जे में है एजेंसी ने छापेमारी करके सारे दस्तावेजो को पहले ही अपने कब्जे में लिया हुआ है. मेरे मुवक्किल को अभी तक मांगने के बावजूद ECIR कॉपी नहीं दी गई है. भला ECIR कॉपी में कौन सा राष्ट्रीय रहस्य है.

मैंने कोई दस्तावेजों की हेराफेरी नहीं की है,मेरी ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा को कोई खतरा नहीं है. बस ईडी मुझे बन्द रखने के लिए केस को ग्लोरीफाई कर रही है.

‘समाज में गहरी पैठ है’

ASG नटराजन ने कहा कि डीके शिवकुमार की समाज में गहरी पैठ है, लेकिन इससे बड़ी गहरी साजिश इस केस में नजर आती है,जिसका खुलासा ज़रूरी. ज़मानत देने पर वो सबूतो से छेड़छाड़ कर सकते है.

आयकर विभाग जांच के दौरान कुछ गवाहों ने बयान दिये, लेकिन 7-8 महीने बाद वो पलट गए. जाहिर है, उनको आरोपी की ओर से प्रभावित किया गया.

’21वां खाता एजेंसी दिखा दे’

शिवकुमार की ओर से सिंघवी ने कहा, सिर्फ 41 लाख की रकम बरामद की गई, फिर ये 143 करोड़ की रकम कहाँ से आ गई. शिवकुमार के सिर्फ 20 खाते है. अगर एक भी इनके अलावा 21 वां खाता एजेंसी दिखा दे तो मैं अपनी दलीले बंद कर दूंगा.

‘जांच इसी दायरे में रहनी चाहिए’

सिंघवी के बाद डी के शिवकुमार की ओर से मुकल रोहतगी पेश हुए. रोहतगी ने कहा, मेरे मुवक्किल की समाज में अपनी एक प्रतिष्ठा है. वो 7 बार विधायक रह चुके हैं. ख़ुद कानून इस बात को मानता है कि बेल नियम है, जेल अपवाद है.

कोर्ट को ये ध्यान रखना चाहिए. इस केस में ECIR 2017 में की गई रेड पर आधारित है. रेड में मेरे घर से जो मिला है, वो सिर्फ 41 लाख है. जांच इसी दायरे में रहनी चाहिए.

कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

दयाकृष्णन ने दलीले रखते हुए कहा, अभी जेलो में जो भीड़ है, वो कोर्ट के सामने एजेंसियों के इसी रवैये के चलते है. उनको कभी लगता है कि चिंदबरम कानून से भाग जायेगें, कभी शिवकुमार. शनिवार को डीके शिवकुमार की जमानत याचिका पर बहस पूरी हो गई है लेकिन राउज एवेन्यू कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है.

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