मां ने अस्पताल में छोड़ा, डॉक्टर ने मंदिर के पास; चली गई जान, नवजात को दुनिया नहीं आई रास

जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने दो अक्टूबर को शिशु को विजयवाड़ा के अस्पताल ले जाने को कहा. विजयवाड़ा के सरकारी अस्पताल में शिशु को मृत घोषित कर दिया गया.

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एक कहावत है पूत कपूत हो सकता है लेकिन माता कुमाता नहीं हो सकती. आंध्रप्रदेश के कृष्णा जिले में एक कलयुगी मां ने इस कहावत को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है.

दरअसल यह कलयुगी मां नर्सिंग होम में अपने बच्चे को जन्म देने के बाद फ़रार हो गई. जिसके बाद नर्सिंग होम ने भी घोर अमानवीय व्यवहार दिखाते हुए उस नवजात शिशू को बाहर मंदिर के पास मरने के लिए छोड़ दिया.

बताया जा रहा है कि जन्म देने वाली मां की शादी नहीं हुई थी और लोकलाज की वजह से वहां से भाग गई. इस मामले में शनिवार को एक निजी डॉक्टर और एक एएनएम को गिरफ्तार किया गया है.

पुलिस के अनुसार शिशु को एक अक्टूबर को माचिलीपटनम के एक नर्सिंग होम में छोड़ दिया गया था. उसी दिन डॉ. धनवंतरि श्रीनिवासाचार्य और एएनएम बेबी रानी की अगुवाई में नर्सिंग कर्मचारियों ने बच्चे को कथित रूप से श्री वेंकेटेश्वरसामी मंदिर के समीप फेंक दिया था.

स्थानीय लोगों से सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शिशु को जिला अस्पताल में भर्ती कराया. जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने दो अक्टूबर को शिशु को विजयवाड़ा के अस्पताल ले जाने को कहा. विजयवाड़ा के सरकारी अस्पताल में शिशु को मृत घोषित कर दिया गया.

पुलिस के अनुसार इस नवजात शिशु को उसकी मां द्वारा छोड़े जाने के बाद डॉ. श्रीनिवासाचार्य और एएनएम बेबी रानी को उसे फेंकने की घटना में शामिल पाया गया. वैसे जो डॉक्टर प्रसव के वक्त मौजूद था, वह फरार है.

चिलाकलापुडी के सर्किल इंस्पेक्टर एम. वेंकेटनारायण ने बताया कि माचिलीपटनम के ग्राम राजस्व अधिकारी सुधाकर की शिकायत पर डॉ. श्रीनिवासाचार्य और एएनएम को गिरफ्तार किया गया है.

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