अमेरिका के लिए आसान नहीं होगी ईरान से युद्ध की राह, तेल टैंकर पर हमले के बीच बढ़ रहा तनाव

ताज़ा हालात को ध्यान में रखते हुए अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के बादल मंडराते दिख रहे हैं.
Iran oil tanker attack, अमेरिका के लिए आसान नहीं होगी ईरान से युद्ध की राह, तेल टैंकर पर हमले के बीच बढ़ रहा तनाव

नई दिल्ली: ओमान की खाड़ी में दो तेल टैंकरों पर हमले को लेकर आरोप-प्रत्यारोप के बीच अनेरिकी सेना ने एक वीडियो जारी किया है. अमेरिका के मुताबिक ये हमला ईरान ने करवाया है.

अमेरिका का कहना है, “ये ईरान ने ही किया है क्योंकि आप वीडियो में उस नाव को देख सकते हैं. मुझे लगता है कि एक विस्फोटक फटा नहीं और शायद इस पर ईरान की पहचान थी. आप देख सकते हैं कि रात में नाव के जरिए विस्फोटक हटाने की कोशिश की जा रही है और विस्फोटक हटा भी लिया जाता है. ये नाव ईरान की थी, नाव में सवार लोग भी ईरान के थे. ईरान कोई सुबूत नहीं छोड़ना चाहता लेकिन शायद उसे पता नहीं कि हम अंधेरे में चीज़ें ढूंढ निकालने में माहिर हैं.”

अमेरिका के विदेश सचिव माइक पोम्पियो ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, “ये अमेरिका का आकलन है कि उन हमलों के पीछे ईरान का हाथ है.”

उन्होंने का “ये आकलन हमारी खुफ़िया एजेंसी, जिस तरह के हथियार इस्तेमाल हुए, जिस तरह की विशेषता इसके लिए चाहिए थी, उस इलाके में किसी और ग्रुप के पास ऐसी कार्रवाई के लिए संसाधन नहीं है, इन सब बातों को देखते हुए इस आकलन पर पहुंचे हैं.”

बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है. तनाव की स्थिति उत्पन्न होने की मुख्य वजह बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए परमाणु करार से अमेरिका का अलग होना और ईरान पर सख़्त प्रतिबंध लगाना है.

हालांकि ईरान का कहना है कि उसने कोकुका करेजियस टैंकर के बोर्ड से 21 लोगों को और 23 लोगों को फ़्रंट अल्टायर से सुरक्षित बचाया है.

इस घटना के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच ज़ुबानी जंग शुरू हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर ईरान को धमकाते हुए कहा, ‘अगर ईरान युद्ध चाहता है तो ये उसका औपचारिक अंत होगा. अमरीका को आइंदा धमकी मत देना!’

वहीं ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने जवाब में कहा, “ऐसे तानों से ईरान ख़त्म नहीं होगा.”

ताज़ा हालात को ध्यान में रखते हुए अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के बादल मंडराते दिख रहे हैं. सवाल यह उठता है कि क्या अमेरिका के लिए ईरान पर हमला करना इतना आसान होगा?

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अमेरिका के लिए ईरान पर हमला करना आसान नहीं

साल 1979 में ईरान आंतरिक कलह झेल रहा था. इराक़ के शासक सद्दाम हुसैन का मानना था कि ईरान आंतिक कलह की वजह से कमज़ोर होगा इसलिए उसपर हमला करना आसान होगा. इसी सोच के साथ साल 1980 में सद्दाम हुसैन ने इराक़-ईरान सीमा के नज़दीक भारी मात्रा में विस्फोटक गिराए.

जबाब में ईरान ने भी हमला बोला. 1980 से 1988 के बीच दोनों देशों के बीच युद्ध चलता रहा. बताया जाता है इस युद्ध के पीछे अमेरिका की शह थी जिस वजह से इराक ने ईरान पर हमला बोला.

युद्ध के दौरान ईरानी सेना इराक के अंदर तक घुस गई और उन क्षेत्रों पर कब्ज़ा कर लिया जिसे इराकी सेना ने पहले हथिया लिया था. हालांकि इस युद्ध में ईरान को काफी जान माल का नुकसान भी हुआ था.

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