नागरिकता संशोधन बिल: अमित शाह बोले- मेरी सात पुश्‍तें यहीं पैदा हुईं, मैं यहीं मरूंगा

नागरिकता संशोधन बिल में मुस्लिमों को शामिल न करने को सेक्‍युलरिज्‍म के खिलाफ बताने वाले विपक्ष के आरोपों का एक-एक कर जवाब दिया.

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  • Publish Date - 7:58 pm, Wed, 11 December 19

नई दिल्‍ली: नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill) पर राज्‍यसभा में चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर एक के बाद एक पलटवार किए.

नागरिकता संशोधन बिल में मुस्लिमों को शामिल न करने को सेक्‍युलरिज्‍म के खिलाफ बताने वाले विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए अमित शाह ने बुधवार को कहा, ‘मोदी सरकार देश के संविधान पर भरोसा रखती है और मैं भरोसा दिलाता हूं कि यह देश कभी मुस्लिम मुक्त नहीं होगा. मुझे आइडिया ऑफ इंडिया की बात मत बताइए. मैं विदेश में नहीं, यहीं पैदा हुआ हूं और मेरी सात पुश्तें यहीं पैदा हुई हैं. मैं यहीं पैदा हुआ हूं और यहीं मरूंगा.’

अमित शाह ने सोनिया गांधी का नाम लिए बगैर कहा, ‘जिसको आइडिया ऑफ इंडिया समझाना है, उसको समझाइए, मुझे मत समझाइए.’

मुसलमानों को नागरिकता संशोधन बिल में क्‍यों नहीं लिया, अमित शाह ने बताई वजह

अमित शाह ने कहा कि नागरिकता संशोधन बिल में कई धर्म के प्रताड़ित लोगों को भारत की नागरिकता मिलेगी, लेकिन विपक्ष का ध्यान केवल मुस्लिमों पर है. गृह मंत्री ने कहा कि इस बिल में उनके लिए व्यवस्था की गई है, जो पड़ोसी देशों में धार्मिक आधार पर प्रताड़ित किए जा रहे हैं, जिनके लिए वहां जान बचाना, अपनी माताओं-बहनों की इज्जत बचाना मुश्किल है. ऐसे लोगों को यहां की नागरिकता देकर हम उनकी समस्या को दूर करने के प्रयास कर रहे हैं.

अमित शाह ने कहा कि हम अपने देश में पाकिस्‍तान, अफगानिस्‍तान और बांग्‍लादेश के अल्‍पसंख्‍यकों को नागरिकता देने जा रहे हैं. ये तीनों देश खुद को इस्‍लामिक राज्‍य मानते हैं, ऐसे में वहां मुसलमानों के प्रताडि़त होने की संभावना बेहद कम है. अगर इन देशों का कोई मुस्लिम प्रताडि़त होता है, तो वह आवेदन कर सकता है. अमित शाह ने बताया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में ऐसे 566 मुसलमानों को भी भारत की नागरिकता दी गई है. यही कारण है कि पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश और अफगानिस्‍तान के अल्‍पसंख्‍यकों, मतलब- हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन और क्रिश्चियन को नागरिकता दी जा रही है.

अमित शाह ने देश के मुसलमानों को भी दिलाया भरोसा

अमित शाह ने कहा कि नागरिकता संशोधन बिल का भारत में रह रहे मुसलमानों से कोई लेना-देना नहीं है. इस बिल से भारत के मुसलमानों का कोई अधिकार नहीं जाता. ये नागरिकता देने का बिल है, नागरिकता लेने का बिल नहीं है. अमित शाह ने कहा, ‘मैं सबसे कहना चाहता हूं कि भ्रामक प्रचार में मत आइए. इस बिल का भारत के मुसलमानों की नागरिकता से कोई संबंध नहीं है.’