जवानों को कड़ाके की ठंड में मिलेंगी ताजा सब्जियां और पौष्टिक भोजन, DRDO ने विकसित की खास तकनीक

लेह-लद्दाख (Ladakh) में चीन (China) से लो​हा ले रही भारतीय सेना (Indian Army) आने वाले दिनों में यहां पड़ने वाली कड़ाके की लंबी सर्दी के लिए तैयारियां कर रही है.

  • TV9 Digital
  • Publish Date - 11:06 pm, Tue, 22 September 20

लेह-लद्दाख (Ladakh) में चीन (China) से लो​हा ले रही भारतीय सेना (Indian Army) आने वाले दिनों में यहां पड़ने वाली कड़ाके की लंबी सर्दी के लिए तैयारियां कर रही है. वहीं रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने लेह और आस-पास के ठंडे इलाकों में भारतीय सेना के लिए सब्‍जी उगाने का काम शुरू किया है. जिन्हें आने वाली सर्दियों के मौसम में भारत-चीन सीमा पर तैनात सैनिकों के लिए उपयोग किया जा सके.

सब्जी उगाने के लिए डीआरडीओ माइक्रोग्रीन तकनीक का इस्तेमाल कर रही है. इसके लिए लेह (Leh) में DRDO के यूनिट डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ हाई एल्टीट्यूड रिसर्च किसानों और आर्मी यूनिट्स को ट्रेनिंग दे रहा है.

इस तकनीक से सेना के जवानों को मिलेगा ताजा और पौष्टिक भोजन

डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ हाई एल्टीट्यूड रिसर्च (डीहार) के वैज्ञानिक डॉ. दोर्जी ने बताया कि थल सेना बहुत कठिन इलाकों में तैनात है. उन क्षेत्रों में पौधों के विकास के लिए उपयुक्त पर्यावरण मिलना मुश्किल है. इस माइक्रोग्रीन तकनीक से हमारे जवानों को ताजा और पोष्टिक भोजन मिल सकेगा.

वहीं डीहार निदेशक, डॉ.ओपी चौरसिया ने कहा कि हमारे पास भूमिगत ग्रीनहाउस भी हैं. हमारा मकसद सर्दियों में सब्जियों के भंडारण तंत्र को विकसित करने का है. यह एक शून्य ऊर्जा-आधारित भंडारण तकनीक है, जो 4-5 महीनों के लिए आलू, फूलगोभी और गाजर को स्टोर करने में मदद करेगी.

एलएसी पर भारत का चीन के साथ गतिरोध जारी है. दोनों देशों के करीब एक लाख सैनिक सीमा पर तैनात हैं. डीआरडीओ का यह कदम भारतीय सेना के लिए बेहद खास है. क्‍योंकि जब लद्दाख में तापमान माइनस 30 और 40 डिग्री तक चला जाता है तब यहां सब्जियां उगाना बेहद मुश्किल हो जाता है. लद्दाख में भारी बर्फबारी के बाद अक्‍सर रास्‍ते बंद हो जाते हैं. तब ताजा सब्‍जी मिलना बहुत मुश्किलभरा काम हो जाता है.