‘कमजोर हो रही है अर्थव्‍यवस्‍था’, RBI मीटिंग में बोले गवर्नर शक्तिकांत दास

3-6 जून के बीच आयोजित एमपीसी की बैठक में RBI ने प्रमुख ब्याज दरों में कटौती करने का फैसला लिया था.

नई दिल्‍ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने अर्थव्‍यवस्‍था की रफ्तार को लेकर बड़ी बात कही है. पिछली मौद्रिक नीति समिति (MPC) बैठक में ब्याज दरों में कटौती के लिए तर्क देते हुए दास ने कहा था कि इस बात के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि आर्थिक गतिविधियां कमजोर हुईं हैं. इसी महीने 3-6 जून के बीच आयोजित MPC की बैठक में केंद्रीय बैंक ने प्रमुख ब्याज दरों में कटौती करने का फैसला लिया था.

MPC की बैठक के मिनिट्स के अनुसार RBI गवर्नर ने कहा, ” वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में जीडीपी विकास दर घटकर 5.8 फीसदी होने से इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि आर्थिक गतिविधियां कमजोर हुई हैं.”

दास ने कहा, “आर्थिक विकास दर की रफ्तार स्पष्ट रूप से कमजोर हुई है जबकि नीतिगत ब्याज दर में पिछली दो कटौती का हस्तांतरण होने के बावजूद प्रमुख महंगाई दर 2019-20 में चार फीसदी से नीचे रहने का अनुमान है.”

पूर्व CEA ने GDP के आंकड़ों पर उठाए थे सवाल

अर्थव्‍यवस्‍था की रफ्तार को लेकर पूर्व आर्थिक सलाहकार (CEA) अरविंद सुब्रह्मण्यम ने भी सवाल उठाए थे. दो दिन पहले, सुब्रह्मण्यम ने अपने रिसर्च पेपर में दावा किया था कि 2011-12 के बाद की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) विकास दर के आंकड़ों को ज्यादा करके आंका गया है.

सुब्रह्मण्यम ने अपने शोध-पत्र ‘इंडियाज जीडीपी मिस-एस्टिमेशन : लाइकलीहुड, मैग्निट्यूड्स, मेकेनिज्म्स एंड इंप्लीकेशंस’ में दावा किया है कि 2011-12 से लेकर 2016-17 के बीच भारत की जीडीपी विकास दर का आंकलन सालाना 2.5 फीसदी अधिक किया गया है.

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (PMEC) ने GDP पर सुब्रह्मण्यम के रिसर्च पेपर को खारिज कर दिया. बिबेक देबराय की अध्यक्षता में PMEC ने सुब्रह्मण्यम के पेपर में कई खामियां बताईं. परिषद ने सुब्रह्मण्यम के उस दावे पर भी सवाल किया है, जिसमें कहा गया है कि शोध-पत्र में इस्तेमाल किए गए 17 संकेतक 2001-02 से लेकर 2016-17 के दौरान के GDP से सहसंबद्ध हैं.

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