मंत्री पद की शपथ लेने से पहले ही अशोक चव्हाण का राहु काल शुरू, ED ने आदर्श सोसाइटी घोटाले की जांच की तेज

फ़िलहाल मामले की जांच सीबीआई, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और प्रवर्तन निदेशालय कर रहे हैं. अभी तक सरकार और सेना की ओर से कई जांच की जा चुकी है.
Adarsh Society scam, मंत्री पद की शपथ लेने से पहले ही अशोक चव्हाण का राहु काल शुरू, ED ने आदर्श सोसाइटी घोटाले की जांच की तेज

पिछले एक महीने में महाराष्ट्र ने राजनीति के कई रंग देखे. आख़िरकार शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे का मुख्यमंत्री बनना तय हुआ. गुरुवार शाम उद्धव ठाकरे पूरे कैबिनट के साथ शिवाजी पार्क में शपथ लेंगे. उनके साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक चव्हाण भी मंत्री पद की शपथ लेंगे.

ये वही अशोक चव्हाण हैं जिनको आदर्श सोसायटी घोटाला मामले में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था.

ताज़ा ख़बर यह है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आदर्श सोसायटी घोटाले की जांच तेज़ कर दी है. इसी संबंध में बुधवार को ईडी की टीम कोलाबा के आदर्श सोसायटी पहुंची. ऐसे में मंत्री बनते ही ज़िम्मेदारियों के साथ-साथ अशोक चव्हाण की मुश्किलें भी बढ़ने वाली है.

आदर्श सोसाइटी ने ईडी को लिखा है कि आवश्यक दस्तावेजों को प्रस्तुत करने के लिए उन्हें तीन महीने का समय चाहिए. क्योंकि उन्हें ये दस्तावेज सीबीआई से वापस लेना है. जांच के दौरान सीबीआई ने दस्तावेज ले लिया था. सोसाइटी ने ईडी को किसी भी तरह की कार्रवाई या बिल्डिंग को अटैच करने से पहले 15 दिन का अग्रिम नोटिस देने को कहा है.

फ़िलहाल मामले की जांच सीबीआई, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और प्रवर्तन निदेशालय कर रहे हैं. अभी तक सरकार और सेना की ओर से कई जांच की जा चुकी है.

Adarsh Society scam, मंत्री पद की शपथ लेने से पहले ही अशोक चव्हाण का राहु काल शुरू, ED ने आदर्श सोसाइटी घोटाले की जांच की तेज

 

क्या है Adarsh Society scam मामला?

महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के कोलाबा में आदर्श हाउसिंग सोसायटी बनाई. यह 31 मंजिला इमारत युद्ध में मारे गए सैनिकों की विधवाओं और भारतीय रक्षा मंत्रालय के कर्मचारियों के लिए बनाई गई थी. लेकिन साल 2010 में एक आरटीआई की वजह से इस घोटाले का पर्दाफ़ाश हुआ. मालूम पड़ा कि नियमों को ताक पर रख कर सोसायटी के फ्लैट्स को ब्यूरोक्रैट्स, राजनेताओं और सेना के अफसरों को बेहद कम दामों में बेच दिया गया. जिसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

21 दिसंबर 2010 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी माना कि पूरा मामला धोखेबाजी का है. जिसके बाद कोर्ट ने सोसायटी को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया. पर्यावरण नियमों को ताक पर रखने की वजह से केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इस इमारत को तीन महीने में गिराने की सिफ़ारिश की थी.

सीबीआई ने इस मामले में कुल 8 गिरफ्तारियां की हैं. इसमें दो रिटायर्ड मेजर जनरल टीके ठाकुर और एआर कुमार, रिटायर्ड ब्रिगेडियर एमएम वांचू, पूर्व जनरल ऑफिसर कमांडिंग ऑफ महाराष्ट्र, प्रमोटर कन्हैयालाल गिडवानी और प्रदीप व्यास और शहर के तत्कालीन कलेक्टर, महाराष्ट्र सरकार में फाइनेंस सेक्रेटरी भी शामिल हैं.

2012 में महाराष्ट्र सरकार ने इसी केस में दो IAS अफसरों को सस्पेंड करने की घोषणा की थी.

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