एप और फर्म बैन के बाद चीन पर ऐसे ‘स्ट्राइक’ कर सकता है भारत, अब यूनिवर्सिटीज टाई-अप की समीक्षा

चीन का शिक्षा मंत्रालय (Education Ministry of China) इन कन्फ्यूशियस इंस्टिट्यूट्स (Confucius Institutes) में डायरेक्ट फंडिंग करता है, जिसका उद्देश्य चीनी भाषा और संस्कृति (Chinese Language and Culture) को प्रमोट करना है.
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चीनी फर्म (Chinese Firm) और चाइनीज एप (Chinese App) को बैन करने के बाद अब भारत का अगला टारगेट वो यूनिवर्सिटी हैं, जिनका देश में चीन से टाई-अप है. भारतीय शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) ने आने वाले हफ्ते में इन यूनिवर्सिटीज की समीक्षा करने का निर्णय लिया है. सुरक्षा एजेंसियों द्वारा भारत में उच्च शिक्षा में बढ़ते चीनी प्रभाव के प्रति सतर्क रहने के बाद सात स्थानीय कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर काम करने वाले कन्फ्यूशियस इंस्टिट्यूट्स (Confucius Institutes) की समीक्षा की जाएगी.

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विदेश मंत्रालय और यूजीसी को नोटिफिकेशन जारी

एचटी की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने आईआईटी, बीएचयू, जेएनयू और एनआईटी और चीनी संस्थानों समेत प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थानों के बीच साइन हुए 54 मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoUs) की समीक्षा करने की भी योजना बनाई है. इसके लिए पहले ही विदेश मंत्रालय और यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिश्न को निटिफेकेशन जारी किया जा चुका है.

चीन का शिक्षा मंत्रालय इन कन्फ्यूशियस इंस्टिट्यूट्स में डायरेक्ट फंडिंग करता है, जिसका उद्देश्य चीनी भाषा और संस्कृति को प्रमोट करना है. हालांकि चाइनीज प्रोपेगेंडा का प्रचार करने को लेकर चीन की अमिरेका और ब्रिटेन सहित दुनिया भर में आलोचना हो रही है.

ऑनलाइन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में ये खबर सामने आई थी कि ऑस्ट्रेलिया इसकी जांच कर रहा है कि क्या यूनिवर्सिटीज और इंस्टिट्यूशंस के बीच विदेशी-हस्तक्षेप कानूनों को तोड़ा गया है? इस दौरान दुनिया भर की कई यूनिवर्सिटीज ने कन्फ्यूशियस इंस्टिट्यूट्स द्वारा ऑपरेट किए जा रहे प्रोग्राम्स को बंद कर दिया था.

ये यूनिवर्सिटी और इंस्टिट्यूट्स शामिल

भारत सरकार ने जिन कन्फ्यूशियस इंस्टिट्यूट्स की समीक्षा करने का फैसला लिया है, उनमें यूनिवर्सिटी ऑफ मुंबई, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी- जालंधर, वेलौर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, सोनीपत स्थित ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी, कोलकाता स्थित स्कूल ऑफ चाइनीज लैंग्वेज, कोयम्बटूर की भरतहिआ यूनिवर्सिटी और गुरुग्राम स्थित केआर मंगलम यूनिवर्सिटी शामिल हैं. जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी का भी हनबन (कन्फ्यूशियस इंस्टिट्यूट का हेडक्वार्टर) के साथ एक MoU है. हालांकि केंद्र सरकार ने इसके लिए अभी कोई समीक्षा से अलग रखा है.

कन्फ्यूशियस इंस्टिट्यूट्स और MoUs की समीक्षा करने का निर्णय ऐसे समय में लिया गया है, जब चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के कब्जे वाले अक्साई चिन में 50,000 से अधिक सैनिकों, टैंकों, मिसाइलों और तोपों को एकत्र किया गया है. चीन ने ऐसा कर पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर भारत के साथ बढ़ते विवाद पर चीन ने अपना आक्रामक रुख दिखाने की कोशिश की है. इतना ही नहीं पीएलए ने उत्तराखंड के मध्य क्षेत्र और अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में भी तैनाती का प्रसार किया है.

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