IIT के M.Tech कोर्स की फीस में बढ़ोतरी ड्रॉपआउट होने वाले छात्रों पर सर्जिकल स्ट्राइक: रामगोपाल राव

IIT दिल्ली के डायरेक्टर वी रामगोपाल राव ने कहा, "कई छात्र M.Tech प्रोग्राम में एडमिशन लेते हैं और नौकरी मिलने पर उनमें से 50 प्रतिशत प्रोग्राम छोड़ देते हैं."

IIT दिल्ली के डायरेक्टर वी रामगोपाल राव का कहना है कि IIT के M.Tech प्रोग्राम में 50 प्रतिशत से ज्यादा ड्रापआउट रेट रिकॉर्ड की जाती है. उनके मुताबिक ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब तक नौकरी न लग जाए या कोई प्रतियोगी परीक्षा क्रैक न हो जाए तब तक छात्र इस कोर्स को स्टॉपगैप के रूप में देखते हैं. ऐसा कहते हुए रामगोपाल राव का मानना है कि हाल ही में कोर्स की फीस में जो बढ़ोतरी की गई है वो ऐसे छात्रों पर सर्जिकल स्ट्राइक है.

डायरेक्टर राव का मानना ​​है कि M.Tech प्रोग्राम के लिए फीस में बढ़ोतरी के IIT काउंसिल के फैसले से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में सीटों की मांग की समस्या ठीक हो जाएगी और सरकारी धन की बचत होगी. उन्होंने कहा, “कई छात्र M.Tech प्रोग्राम में एडमिशन लेते हैं और नौकरी मिलने पर उनमें से 50 प्रतिशत प्रोग्राम छोड़ देते हैं.”

डायरेक्टर राव ने फैसले को बताया साहसिक निर्णय

उनका कहना है कि बचे हुए लोगों में, कई अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और इस कोर्स में कोई दिलचस्पी नहीं लेते हैं. मालूम हो कि राव भी IIT काउंसिल के सदस्य हैं और यह काउंसिल सभी 23 IIT पर निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था है. उन्होंने कहा कि इससे देश के कीमती संसाधनों की बर्बादी होती है. राव का कहना है, “जाहिर है, एक सर्जिकल स्ट्राइक की जरूरत थी. मुझे खुशी है कि मंत्रालय और परिषद ने इस तरह का साहसिक निर्णय लिया.”

तीन सदस्यीय समिति की सिफारिशों पर लिया गया निर्णय

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल की अगुवाई वाली IIT काउंसिल ने शुक्रवार को मास्टर्स प्रोग्राम की फीस में बढ़ोतरी कर B.Tech कोर्स की बराबरी पर लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. IIT में M.Tech प्रोग्राम में सुधारों पर तीन सदस्यीय समिति की सिफारिशों पर निर्णय लिया गया.

मानव संसाधन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, “समिति ने M.Tech फीस में बढ़ोतरी और इसे अगले तीन वर्षों में कम से कम B.Tech फीस (प्रति वर्ष 2 लाख रुपए) के बराबर तक लाने की सिफारिश की थी. इसके साथ ही जरूरतमंद छात्रों को प्रत्यक्ष लाभ ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सरकार द्वारा सीधे समर्थन दिया जाएगा या शैक्षिक लोन की व्यवस्था की जाएगी.”

ये भी पढ़ें: 24 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर में होंगे ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल के चुनाव