देशभर में मनाई जा रही EID, जानिए क्या है इसका इस्लाम के इतिहास की पहली जंग से वास्ता?

कोरोनावायरस (Coronavirus) के कारण इस बार ईद (Eid 2020) की खुशियों में थोड़ा ब्रेक लगा है. लोग मस्जिदों में नमाज नहीं पढ़ने जा पाए. लोग हमेशा की तरह इस साल ईद की खरीदारी कुछ खास नहीं कर पाए.
EID 2020 celebration, देशभर में मनाई जा रही EID, जानिए क्या है इसका इस्लाम के इतिहास की पहली जंग से वास्ता?

दुनियाभर के मुसलमान ईद (Eid) का बेसब्री से इंतजार करते हैं. खासकर ईद-उल-फित्र (Eid-ul-Fitra) का जो कि रमजान के बाद आती है. रमजान (Ramadan) के महीने में लोग पूरे 30 दिन तक रोजा रखते हैं और इस एक महीने बाद जब ईद का चांद नजर आता है, तब वे अपना व्रत तोड़ते हुए खुशहाल जिंदगी देने के लिए अल्लाह को शुक्रिया अदा करते हैं. आज यानि 25 फरवरी को ईद-उल-फित्र (Eid-ul-Fitra 2020) पूरे देश में मनाई जा रही है.

हालांकि कोरोनावायरस (Coronavirus) के कारण इस बार ईद की खुशियों में थोड़ा ब्रेक लगा है. लोग मस्जिदों में नमाज नहीं पढ़ने जा पाए. लोग हमेशा की तरह इस साल ईद की खरीदारी कुछ खास नहीं कर पाए. बाजार नहीं सजे और न ही ईद से पहले दिखने वाली चहल-पहल कहीं नजर आई. लोग घरों में रहकर ईद मना रहे हैं.

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इस्लामिक कैलेंडर (Islamic Calendar) के अनुसार, 10वें शव्वाल की पहली तारीख को रमजान के महीने की ईद यानी ईद-उल-फित्र मनाई जाती है. ईद वाले दिन रोजा नहीं cरखा जाता. ईद के चांद का दीदार होने के बाद ही लोग ईद की नमाज अदा करते हैं और परिवार संग खुशियां मनाते हैं.

क्यों मनाते हैं ईद-उल-फितर?

एक महीने तक रोजा रखने के बाद ईद का त्योहार क्यों मनाया जाता है, इसके पीछे एक लंबी कहानी है. ऐसा माना जाता है कि पैगम्बर हजरत मुहम्मद (Prophet Mohammad) अरब में अच्छाइयों का प्रचार-प्रसार कर रहे थे. वे लोगों को बुराई की राह पर न चलने के लिए प्रेरित करते थे. अरब के कई लोग बुरी चीजों से ग्रस्त थे. जब पैगम्बर ने अच्छाई का प्रचार-प्रसार करना शुरू किया था, तो कई लोग उनका विरोध करने लगे थे. विरोध इतना बढ़ा कि 624 ईस्वी में बात जंग तक पहुंच गई.

कहा जाता है कि सऊदी अरब के मदीना से करीब 200 किलोमीटर की दूर बद्र में पैगम्बर का उनके विरोधियों के साथ युद्ध हुआ. पैगम्बर मोहम्मद के साथ काफी कम लोग शामिल थे और उनके सामने एक विशाल सेना थी. हालांकि कम लोग साथ में होने के बावजूद पैगम्बर मोहमम्द ने बद्र के युद्ध में विजय प्राप्त की थी. इसी जीत की खुशी में यह पर्व मनाया जाता हैं. कहा जाता है कि 624 ईस्वी में ही पहला ईद-उल-फित्र मनाई गई थी.

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