तेज बहादुर यादव के नामांकन में गलती पर भेजे गए नोटिस में चुनाव आयोग ने खुद भी की गलती!

तेज बहादुर यादव का नामांकन रद्द हो चुका है, लेकिन तेज बहादुर यादव के नामांकन में कमी निकालनेवाले चुनाव आयोग ने खुद अपने नोटिस में एक गलती कर दी.

चुनाव में सबके नामांकन पत्र जांचनेवाला जिला निर्वाचन आयोग भी कभी-कभी गलती कर बैठता है. ये तब पता चला जब आयोग ने वाराणसी से लोकसभा प्रत्याशी बने तेज बहादुर यादव को नोटिस भेजा.

आयोग ने ये नोटिस दो-दो हलफनामे दाखिल करने के मामले में तेज बहादुर को भेजा था. तेज बहादुर ने एक हलफनामा निर्दलीय उम्मीदवार तो दूसरा समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर जमा किया था. उन्हें शालिनी यादव की जगह उम्मीदवार बनाया गया था.

जिला निर्वाचन आयोग ने जो नोटिस भेजा उसमें आप साफ देख सकते हैं कि तेज बहादुर यादव को साक्ष्य जमा करने के लिए 90 साल का समय दिया गया है. दरअसल लिखना तो 1-05-2019 था लेकिन लिखा गया 1-05-2109.

ज़ाहिर है, टाइपिंग करनेवाले ने ये गलती की है. नोटिस भेजने से पहले किसी ने इस पर ध्यान भी नहीं दिया. गौरतलब है कि ऐसी गलतियां करने पर उम्मीदवारों के नामांकन पत्र तक निरस्त हो जाते हैं लेकिन खुद आयोग ने वैसी ही गलती की.

आपको बता दें कि जब तेज बहादुर ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर पर्चा भरा था तब उन्होंने सेना की बर्खास्तगी की जानकारी लिखी थी, लेकिन समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में नामांकन करते हुए वो संभवत: जानकारी छिपा गए. नामांकन पत्र की जांच के दौरान रिटर्निंग अफसर ने जब ये देखा तो उन्हें नोटिस भेज जवाब मांगा.

वैसे तेज बहादुर का नामांकन पत्र अब निरस्त हो चुका है. जैसे ही ये खबर आई तो देशभर से प्रतिक्रियाएं मिलने लगीं. RLSP उपेंद्र कुशवाहा ने लिखा कि कुछ दिनों पूर्व PM मोदी जी के विमान की तलाशी लेने वाला ईमानदार IAS पर्यवेक्षक मो. मोहसिन की बर्खास्तगी और अब गरीब किसान का बेटा व पूर्व BSF जवान श्री तेजबहादुर यादव की वाराणासी से उम्मीदवारी रदद्!

दिल्ली के सीएम और आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने तो पीएम मोदी पर ही नामांकन रद्द कराने का आरोप लगा दिया.