दिल्ली वालों को राहत, फिक्स्ड चार्ज घटने से बिजली हुई सस्ती

जो बीजेपी नेता दिल्ली में बिजली कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगा रहे हैं वो बीजेपी शासित राज्यों में दिल्ली से सस्ती बिजली देकर दिखाएं: मनीष सिसोदिया

राजधानी दिल्ली में रहने वालों के लिए बुधवार को एक अच्छी खबर आई. DERC यानी Delhi Electricity Regulatory Commission ने बिजली बिल में हर महीने लगकर आने वाले फिक्स्ड चार्जेस में भारी कटौती की है. इस कटौती के बाद घरेलू उपभोक्ताओं को फायदा होगा. वहीं पर्यावरण के लिहाज से बिजली से चलने वाले वाहनों को चार्ज करने वाले चार्जिंग स्टेशन के लिए भी बिजली के दामों में कटौती की गई है. गैर-घरेलू और कमर्शियल सेक्टर के लिए बिजली महंगी हुई है.

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए फिक्स्ड चार्जेस में भारी कटौती

DERC ने नई टैरिफ सूची जारी की है, जिसके अनुसार 15 किलोवाट तक के घरेलू उपभोक्ताओं के बिल पर लगने वाले फिक्स्ड चार्जेस कम किए गए हैं. जिस 2 किलोवाट के कनेक्शन पर फिक्स्ड चार्जेस 125 रुपये था उसे घटाकर 20 रुपये किया गया. 2 किलोवाट से 5 किलोवाट तक पर फिक्स्ड चार्ज 140 रुपये से घटाकर 50 रुपये किया गया है और वहीं 5 किलोवाट से 15 किलोवाट तक पर फिक्स्ड चार्ज 175 रुपये से घटाकर 100 रुपये  किया गया. फिक्स्ड चार्जेस घटाने से मध्यम वर्गीय परिवारों को फायदा होगा और इन बिजली उपभोक्ताओं की संख्या दिल्ली में सबसे ज्यादा है. ऐसे में दिल्ली सरकार ने प्रति यूनिट बिजली के दाम भले ही न घटाए हों लेकिन फिक्स्ड चार्जेस में भारी कटौती कर आम जनता को सहूलियत जरूर पहुंचाई है.

हालांकि जो घरेलू उपभोक्ता 1200 यूनिट से ज्यादा की बिजली जलाते हैं, उनके लिए बिजली महंगी हुई है. 1200 यूनिट से अधिक के स्लैब पर प्रति यूनिट 25 पैसे ज़्यादा देने होंगे. यूनिट की दर को 7.75 रु से बढ़ाकर 8 रुपये किया गया है.

ई वाहनों को भी ‘1 रुपये’ का फायदा

केंद्र सरकार बिजली से चलने वाले उपकरणों और वाहनों पर ध्यान देना चाहती है ऐसे में दिल्ली सरकार ने भी इस ओर एक कदम बढ़ा दिया है. प्रदूषण फ्री ट्रांसपोर्ट के लिए ई वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशनों के टैरिफ 1-1 रुपये कम किये गए.  11 केवी वाले चार्जिंग स्टेशन पर प्रति यूनिट दर 5.50 रुपये से घटाकर 4.50 रुपये की गई है. वहीं 11 केवी से ऊपर के चार्जिंग स्टेशन पर प्रति यूनिट दर 5 रुपये से घटाकर 4 रुपये की गई है.

घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को छोड़, गैर-घरेलू और कमर्शियल सेक्टर, सार्वजनिक सुविधायें, दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड और बिजली चलित विज्ञापन और होर्डिंग लगाने वाली कंपनियों के लिए प्रति यूनिट बिजली 25 से 50 पैसे तक महंगी हुई है.

फिक्स्ड चार्जेस घटने से किसे-कितना फायदा?

दिल्ली में बिजली बिल पर फिक्स्ड चार्जेस घटने से घरेलू उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने जा रही है.

  • 1 किलोवाट लोड वाले घरेलू उपभोक्ताओं को हर महीने  ₹105 रुपये का फायदा होगा.
  • 2 किलोवाट वालों को हर महीने 210 रूपए कम देने होंगे.
  • 3 किलोवाट वालों को 270 रु और 4 किलोवाट वालों को 360 रु की मासिक बचत होगी.
  • 5 किलोवाट और 6 किलोवाट वाले कनेक्शन पर 450-450 रु की राहत मिलेगी

 

केजरीवाल बोले, बधाई दिल्ली!, तिवारी ने कहा- हमारा शक सही था

DERC द्वारा जारी किए गए नए टैरिफ 1 अगस्त से लागू हो जाएंगे लेकिन इस पर राजनीति भी खूब हो रही है.

टेरेस की घोषणा के बाद सीएम केजरीवाल ने ट्वीट करके दिल्ली की जनता को बधाई दी.

कुछ ही मिनट के बाद दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने ट्विटर पर ही केजरीवाल को जवाब दे दिया.

जनता से सरोकार दिखाने वाला ट्वीट जनता तक पहुंच पाता उससे पहले ही दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बीजेपी पर हमला बोलते दिखे. TV9 भारतवर्ष के सवाल पर सिसोदिया ने कहा, ‘जो बीजेपी नेता दिल्ली में बिजली कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगा रहे हैं वो बीजेपी शासित राज्यों में दिल्ली से सस्ती बिजली देकर दिखाएं.’

इसके अलावा मनीष सिसोदिया ने दूसरे राज्यों की सरकारों से सवाल किया और दिल्ली में बिजली दरों की तुलना दूसरे राज्यों के बिजली दरों से की.

सिसोदिया ने कहा- “दूसरे राज्यों के मुकाबले दिल्ली में बिजली सस्ती है. दिल्ली में 200 यूनिट के दाम 408 रुपये है और वहीं यूपी में 910 रुपये, हरियाणा में 1310 रुपये, मुंबई में 1410 रुपये और राजस्थान में 1588 रुपये है. ऐसा क्या है जो बिजली दिल्ली में सस्ती है वहीं दूसरे राज्यों में महंगी है? “

बिजली की दरों पर और खासकर फिक्स्ड चार्जेस पर बीजेपी केजरीवाल सरकार पर घोटाले का आरोप पहले ही लगा चुकी है. करीब 1 महीने पहले दिल्ली बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिल्ली सरकार पर 7000 करोड रुपये के घोटाले का आरोप लगाया था और बिजली कंपनियों को फिक्स्ड चार्जेस के नाम पर फायदा पहुंचाने की बात भी कही थी. राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप चलते रहेंगे लेकिन फिक्स्ड चार्जेस में कटौती से जनता की जेब पर बोझ कम पड़ेगा और इसका फायदा आने वाले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को भी ज़रूर मिलेगा. ऐसे में सवाल ये भी उठता है कि अगर फिक्स्ड चार्जेस में कटौती दिल्ली सरकार कर सकती थी तो ये फैसला लेने में इतनी देर क्यों हुई? क्या इसके भी अपने राजनीतिक मायने हैं?

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