8.5 करोड़ लोगों को लग सकता है झटका, PF पर ब्‍याज नहीं बढ़ाना चाहता वित्‍त मंत्रालय

वित्त मंत्रालय चाहता है कि ईपीएफओ निधी से जुड़े कर्मचारियों को 8.65 प्रतिशत की दर से ईपीएफ पर ब्याज न दे. ऐसे में अगर EPFO वित्त मंत्रालय की ओर से जारी निर्देश को लागू करता है तो देश भर में करीब 8.5 करोड़ कर्मचारियों को झटका लग सकता है.

नई दिल्ली. प्रोविडेंट फंड पर ब्याज दर को लेकर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) और वित्त मंत्रालय आमने सामने आ गए है. एक तरफ EPFO ब्याज दर बढ़ाने पर अड़ा हुआ है तो दूसरी तरफ वित्त मंत्रालय का कहना है कि ब्याज दर को कम किया जाए. EPFO की ओर से पीएफ पर ब्याज बढ़ाने के लिए भेजे गए प्रस्ताव पर वित्त मंत्रालय ने आपत्ति जताई है. ऐसे में अगर EPFO वित्त मंत्रालय की ओर से जारी निर्देश को लागू करता है तो देश भर में करीब 8.5 करोड़ कर्मचारियों को झटका लग सकता है.

श्रम मंत्रालय और EPFO ने तय 8.65% रिटर्न रेट पर बने रहने का निर्णय किया था. यह दर रिटायरमेंट सेविंग बॉडी के ट्रस्टीज ने प्रस्तावित की थी. यह ध्यान देने वाली बात है कि रिटायरमेंट फंड बॉडी ने इस वर्ष के शुरू में फैसला किया था कि मौजूदा वित्तीय वर्ष FY19 के लिए प्रोविडेंट फंड डिपाजिट पर 2017-18 में दिए गए 8.55% से 10 अंक अधिक 8.65% ब्याज पर दिए जाएंगे. हालांकि, वित्त मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है और दोबारा समीक्षा करने को कहा है.

वित्त मंत्रालय ने EPFO को जो प्रस्ताव दिया है, उसके मुताबिक वो जमा रकम पर मिलने वाले ब्याज में कटौती करना चाहती है. सरकार का तर्क है कि बैंकों में जो ब्याज मिलता है, उससे काफी ज्यादा ब्याज पीएफ खाते में मिलता है. इसको बैंक खातों में मिलने वाले ब्याज के समान करना होगा.

इससे पहले अप्रैल में खबर आई थी कि वित्त मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए EPFO पर 8.65 फीसदी ब्याज दर को मंजूरी दे दी है. इससे पिछले वित्तीय वर्ष में EPFO ने अपने अंशधारकों को 8.55 फीसदी की दर से ब्याज दिया था.

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इसस पहले फरवरी में श्रम मंत्री संतोष गंगवार की अगुवाई में सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (सीबीटी) ने EPF पर ब्याज दर बढ़ाकर 8.65 प्रतिशत करने का फैसला किया था. साल 2016 के बाद पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की गई है.  वित्त वर्ष 2015-16 में ब्याज दर 8.8 फीसदी थी, जिसे घटाकर वित्त वर्ष 2016-17 में 8.65 फीसदी कर दिया गया. इसके बाद फिर वित्त वर्ष 2017-18 में इसे घटाकर 8.55 फीसदी कर दिया गया.

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वित्त वर्ष 2018 में यह पांच साल के सबसे कम स्तर पर किया गया. वित्त वर्ष 2013-14 और 2014-15 के दौरान यह 8.75 फीसदी थी. सीबीटी में सरकार, नियोक्ता और ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधि शामिल हैं और इसकी अगली बैठक पेंशन मुद्दे पर विचार करने के लिए होगी. वित्त मंत्रालय की मंजूरी के बाद ब्याज की रकम को सीधे सब्सक्राइबर्स के खाते में क्रेडिट कर दिया जाएगा.