शहादत के बाद भी आए देश के काम, कौन हैं बदलूराम जिनकी धुन पर नाचे भारत-अमेरिका के सैनिक

युद्ध में बदलूराम के शहीद हो जाने के बाद उनके क्वार्टर से उनका नाम हटाना भूल गए. इसकी जानकारी सेना तक भी नहीं पहुंची थी कि बदलूराम शहीद हो गए हैं.

इन दिनों भारतीय और अमेरिकी सेना अमेरिका के मैककॉर्ड स्थित जॉइंट बेस लेविस में 19वां संयुक्‍त युद्धाभ्‍यास कर रही है. वहीं हाल ही में युद्धाभ्यास के दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जिसमें दोनों देशों के सैनिक एक साथ गाते-झूमते नजर आ रहे हैं.

जिस गाने पर सैनिक झूम रहे थे वह असम रेजिमेंट का मार्चिंग सॉन्ग था, जिसके बोल हैं ‘बदलूराम का बदन जमीन के नीचे रहता है.’ यह गाना हम में से कई लोगों ने सुना भी होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गाने में जिस बदलूराम का जिक्र किया गया है, वे कौन थे? तो चलिए आपको बताते हैं कि कि बदलूराम कौन थे और यह गाना उनके नाम पर कैसे बना.

कौन थे बदलूराम

“बदलूराम का बदन” गाने को सुनकर मन एक दम उत्साहित हो उठता है. यह गाना जितना सुनने में अच्छा लगता है उतनी इसके पीछे की कहानी प्रेरित करती है. यह गाना द्वितीय विश्‍व युद्ध के समय जापानी सेना के साथ संघर्ष करते शहीद हुए राइफलमैन बदलूराम को समर्पित है.

कैसे बना ‘बदलूराम का बदन’ गाना

युद्ध में बदलूराम के शहीद हो जाने के बाद उनके क्वार्टर से उनका नाम हटाना भूल गए. इसकी जानकारी सेना तक भी नहीं पहुंची थी कि बदलूराम शहीद हो गए हैं. इस तरह बदलूराम के नाम पर उनके क्वार्टर पर राशन पहुंचता रहा. बाद में यही अतिरिक्‍त राशन उनकी रेजिमेंट के लिए एक वरदान साबित हुआ. युद्ध के दौरान जापानी सेना ने भारतीय सैनिकों की सप्‍लाई काट दी थी.

भारतीय बटालियन के पास राशन नहीं था और ऐसे में बदलूराम के नाम से आए अतिरिक्‍त राशन से उनकी बटालियन ने काम चलाया. पूरे युद्ध के दौरान यह अतिरिक्‍त राशन निर्णायक साबित हुआ. शहीद होने के बाद भी बदलूराम अपनी बटालियन की मदद करते रहे और इसी कारण उनकी याद में इस गाने को बनाया गया.

पिछले 70 सालों से असम रेजिमेंट इस गाने को गाती आ रही है. इस गीत के बोल अमेरिका के मार्चिंग सॉन्‍ग ‘जॉन ब्राउन बॉडी’ पर आधारित हैं और यह गाना अमेरिकी गृह युद्ध के समय काफी मशहूर हुआ था.

 

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