साध्‍वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के खिलाफ रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स ने खोला मोर्चा

प्रज्ञा ठाकुर ने महाराष्ट्र एसटीएफ के तत्कालीन प्रमुख हेमंत करकरे को लेकर विवादित टिप्पणी की थी.

भोपाल लोकसभा सीट से बीजेपी उम्‍मीदवार साध्‍वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के खिलाफ रिटायर्ड ब्‍यूरोक्रेट्स ने मोर्चा खोल दिया है. 71 रिटायर्ड अधिकारियों ने प्रज्ञा के आईपीएस अधिकारी हेमंत करकरे पर दिए गए बयान की निंदा की है. एक खुले खत में पूर्व अधिकारियों ने प्रज्ञा ठाकुर की उम्‍मीदवार वापस लिए जाने की मांग की है. पूर्व अफसरों ने लिखा है कि प्रज्ञा सिंह ठाकुर मालेगांव ब्‍लास्‍ट केस में आरोपी हैं और मेडिकल आधार पर जमानत पा बाहर चल रही हैं। उन्‍होंने राजनैतिक प्‍लैटफॉर्म का इस्‍तेमाल न सिर्फ ‘कट्टरता का अपना ब्रांड’ फैलाने के लिए किया, बल्कि करकरे का भी ‘अपमान’ किया है जो मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए हमले में आतंकियों से लोहा लेते शहीद हो गए थे.

ब्‍यूरोक्रेट्स ने लिखा है, “…पूर्व सहयोगी के ऐसे अपमान, उस अधिकारी जो अपने पेशेवर रवैये के लिए जाना जाता हो, से हमें धक्‍का लगा है और हम बेहद दुखी हैं. देश को करकरे की शहादत का सम्‍मान करने की जरूरत है.”

पिछले हफ्ते, प्रज्ञा ठाकुर ने महाराष्ट्र एसटीएफ के तत्कालीन प्रमुख हेमंत करकरे को लेकर विवादित टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था, “उन दिनों वह मुंबई जेल में थीं. जांच आयोग ने सुनवाई के दौरान एटीएस के प्रमुख हेमंत करकरे को बुलाया और कहा कि जब प्रज्ञा के खिलाफ कोई सबूत नहीं है तो उन्हें छोड़ क्यों नहीं देते. तब हेमंत ने कई तरह के सवाल पूछे, जिस पर मैंने जवाब दिया कि इसे भगवान जाने. इस पर करकरे ने कहा कि तो, क्या मुझे भगवान के पास जाना होगा.”

प्रज्ञा ने कहा था, “उस समय मैंने करकरे से कहा था कि तेरा सर्वनाश होगा. उसी दिन से उस पर सूतक लग गया था और सवा माह के भीतर ही आतंकवादियों ने उसे मार दिया था. हिंदू मान्यता है कि परिवार में किसी का जन्म या मृत्यु होने पर सवा माह का सूतक लगता है. जिस दिन करकरे ने सवाल किए, उसी दिन से उस पर सूतक लग गया था, जिसका अंत आतंकवादियों द्वारा मारे जाने से हुआ.”

इस बयान पर चुनाव आयोग ने आपत्ति जताते हुए प्रज्ञा ठाकुर को नोटिस भेजा था. जवाब में प्रज्ञा ठाकुर ने कहा था कि उनके बयान का गलत मतलब न निकाला जाए. प्रज्ञा ने कहा था, “केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के निर्देश पर जो यातनाएं दी गई थीं, मैंने उनका उल्लेख किया। मेरा यह अधिकार है कि मेरे साथ जो घटनाएं घटित हुईं, उसे जनता के सामने रखूं. मेरे बयान को मीडिया द्वारा नकारात्मक तरीके से रखा गया.” प्रज्ञा ने चुनाव आयोग को दिए गए जवाब में यह भी कहा है, “मेरी तरफ से किसी धर्म, संप्रदाय जाति के बारे में ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की गई है, जिससे किसी की भावनाएं आहत हुई हों.”

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