रैनबैक्‍सी के पूर्व प्रमोटर्स SC की अवमानना के दोषी, सजा से बचने को जमा कराने पड़ेंगे 2350 करोड़ रुपये

SC के मुताबिक, सिंह ब्रदर्स ने फोर्टिस हेल्‍थकेयर में अपने शेयर ले लिए, जो कि आदेश का उल्‍लंघन था. फोर्टिस हेल्‍थकेयर को भी अवमानना का दोषी करार दिया है.

Ranbaxy के पूर्व प्रमोटर्स- मलविंदर सिंह (Malvinder Singh) और उनके भाई शिविंदर सिंह (Shivinder Singh) को अदालत की अवमानना का दोषी पाया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने जापानी फर्म दाइची सैंक्यो की ओर से दायर मुकदमे पर यह फैसला दिया. टॉप कोर्ट ने फोर्टिस हेल्‍थकेयर को भी अवमानना का दोषी करार दिया है.

SC के मुताबिक, दोनों भाइयों ने फोर्टिस हेल्‍थकेयर में अपने शेयर ले लिए, जो कि आदेश का उल्‍लंघन था. अगर मलविंदर और शिविंदर अवमानना कार्रवाई से बचना चाहें तो दोनों में से हर एक को 1,175 करोड़ रुपये जमा करने होंगे. मार्च में सिंह ब्रदर्स के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की गई थी.

सिंह ब्रदर्स ने 2008 में Ranbaxy को डाइची सांक्‍यो के हाथों 10 हजार करोड़ रुपये में बेचा था. 2013 में दाइची सैंक्यो को अमेरिका में घटिया क्‍वालिटी की दवाएं बेचने की वजह से जुर्माना चुकाना पड़ा था.

बाद में दाइची सैंक्यो ने सिंगापुर मध्यस्थता न्यायाधिकरण में शिकायत की थी कि सिंह बंधुओं ने रैनबैक्सी के खिलाफ अमेरिका के खाद्य एवं औषधि विभाग की चल रही जांच की बात छुपाई थी. इसी के बाद, कंपनी ने सिंह ब्रदर्स के खिलाफ मध्‍यस्‍थता का केस फाइल किया.

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