विशेषज्ञों का अनुमान- 21वीं सदी के अंत तक 2.7 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है भारत का तापमान

सेंटर ऑफ क्लाइमेट चेंज स्टडीज इन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटिरोलॉजी (IITM) के कार्यकारी निदेशक आर कृष्णन (R Krishnan) ने कहा कि तापमान में यह बढ़ोतरी देश के सभी हिस्सों में एक समान नहीं होगी.
India’s temperature set to rise by 2.7 degrees, विशेषज्ञों का अनुमान- 21वीं सदी के अंत तक 2.7 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है भारत का तापमान

आने वाले समय में देश में गर्मी का प्रकोप बढ़ने वाला है. ऐसा इसलिए क्योंकि 21वीं सदी (21st Century) के अंत तक भारत का औसत तापमान लगभग 1.39-2.70 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है.

देश की सभी हिस्सों में अलग-अलग होगी तापमान में बढ़तरी

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, सेंटर ऑफ क्लाइमेट चेंज स्टडीज इन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटिरोलॉजी (IITM) के कार्यकारी निदेशक आर कृष्णन ने कहा कि तापमान में यह वृद्धि देश के सभी हिस्सों में एक समान नहीं होगी.

कृष्णन ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) की तरफ से आयोजित एक वेबीनार में अनुमान जताया है. जलवायु विज्ञान और अर्थ सिस्टम मॉडलिंग पर चर्चा कर रहे थे.

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2070-2099 के बीच 2.70 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी

कृष्णन ने कहा कि “तापमान में बढ़ोतरी 2070 और 2099 के बीच अनुमानित 2.70 डिग्री सेल्सियस तक हो सकती है. ग्रेटर वार्मिंग का मतलब होगा वायुमंडल में अधिक वॉटर वेपर की उपस्थिति, जो आने वाले दशकों में अधिक बारिश का कारण बनेगी. ”

1901 से 2018 के बीच बढ़ा 0.7 डिग्री तापमान

मालूम हो कि 1901 से 2018 तक, भारत का औसत तापमान 0.7 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया था. विशेषज्ञों ने इस बदलाव के लिए ग्रीनहाउस गैसों के प्रभाव के साथ लैंड यूज और लैंड कवर को जिम्मेदार ठहराया था.़

वहीं इससे पहले ऑनलाइन मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि सदी के अंत तक भारत का औसत तापमान 4.4 डिग्री सेल्सियस बढ़ने का अनुमान है और हीट वेव भी 3 से 4 गुना तक बढ़ सकती है.

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