एक निशान, एक विधान के बाद कश्‍मीर में क्‍या बदलने वाला है, जानें

कश्‍मीर पर मोदी सरकार के फैसले से कैसे क्‍या बदलेगा, जानिए
Kashmir, Article 370, एक निशान, एक विधान के बाद कश्‍मीर में क्‍या बदलने वाला है, जानें

नई दिल्‍ली: प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की जोड़ी ने कश्मीर पर वो फैसला कर दिखाया है, जिसका वादा बीजेपी बनने से पहले जनसंघ के जमाने से उनके नेता करते रहे हैं.

पचास के दशक के शुरुआती सालों में अनुच्छेद 370 के खिलाफ एक देश, एक निशान और एक विधान जैसे नारों से जनसंघ ने अपनी धुरी बनाई थी, उसी धुरी पर चलते हुए मोदी सरकार ने उस नारे को अमली जामा पहना दिया है.

सोमवार को संसद में जब अमित शाह अनुच्छेद 370 और 35ए ऐलान कर रहे थे तो कांग्रेस, टीएमसी और कुछ दलों के नेताओं की आवाजें विरोध में जरूर उठी, लेकिन विरोधी खेमे के ही, बीजेडी, बसपा और आम आदमी पार्टी ने कश्मीर पर मोदी सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत और समर्थन का ऐलान कर दिया है.

मोदी सरकार का ये फैसला ऐतिहासिक फैसला है, ऐसा फैसला जिसके बारे में कल तक कई तरह की अफवाहें थीं, लेकिन आज हकीकत है. जिस दिन जम्मू कश्मीर के लिए दस हजार अतिरिक्त बलों की रवानगी हुई, उसी दिन से अंदाजा को लगाया जा रहा था कि कुछ बड़ा होने वाला है, लेकिन एक साथ ये सब हो जाएगा, किसी ने नहीं सोचा था.

अब जरा समझिए कि मोदी सरकार के आज के फैसले से क्या क्या बदल जाएगा

पहले जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा हासिल था लेकिन अब अब विशेष राज्य का ये दर्जा खत्म हो जाएगा. जम्मू कश्मीर के लोगों को पहले दोहरी नागरिकता मिली हुई थी. एक देश की एक राज्य की. अब दोहरी नागरिकता खत्म हो जाएगी. अब सभी भारत के नागरिक होंगे .पहले जम्मू कश्मीर का अलग संविधान था, जिसकी वजह से उन्हें विशेष अधिकार हासिल थे. अब अब वहां भी देश का संविधान लागू होगा.

सारे कायदे कानून लागू होंगे, जिनसे कश्मीर छूट मिली हुई थी. जम्मू कश्मीर में भारत के तिरंगे के साथ साथ साथ वहां राज्य का भी झंडा है. अब वहां भी सिर्फ तिरंगा ही फहराएगा. पहले सूबे से बाहर के लोग वहां जमीन जायदाद नहीं खरीद सकते थे, लेकिन अब देश के किसी भी हिस्से के नागरिक को ये अधिकार वैसे ही हासिल होगा, जैसे देश के बाकी हिस्सों में है. वैधानिक प्रावधानों के तहत ही जम्मू कश्मीर के विधानसभा का कार्यकाल छह साल का है, लेकिन अब देश के बाकी विधानसभाओं की तरह वहां भी छह साल की विधानसभा होगी.

अहम फैसला ये भी है कि पहले जम्मू कश्मीर को विशेष अधिकारों के साथ पूर्ण राज्य का दर्जा था लेकिन अब वो यूनियन टेरिटरी बन जाएगा यानि वहां अब दिल्ली की तरह उप राज्यपाल होगा. जम्मू कश्मीर का छोटा हिस्सा लद्दाख अब अपने आपमें यूनियन टेरिटरी होगा, लेकिन वहां विधानसभा नहीं होगी. अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में और भी कई बदलाव होंगे. हम अपने मेहमानों से बात करेगे मोदी सरकार के इस फैसले और उसके मायने पर लेकिन उससे पहले देखिए आज संसद में किसने क्या कहा .

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