हरियाणा : CID का बॉस कौन? CM और मंत्री के बीच कंफ्यूजन

अनिल विज ने कहा कि "ये मुख्यमंत्री का अधिकार है. मुख्यमंत्री सुप्रीम हैं. अगर वो CID का चार्ज लेना चाहते हैं तो ले सकते हैं."
Manohar Lal Khattar and Anil Vij, हरियाणा : CID का बॉस कौन? CM और मंत्री के बीच कंफ्यूजन

हरियाणा CID किसके अंतर्गत काम करेगा, इसे लेकर कई दिन से कंफ्यूजन थी. अब ये लगभग साफ हो गया है कि CID का बॉस कौन होगा. मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने CID का चार्ज गृह मंत्री अनिल विज से ले लिया है. विज का कहना है कि ‘ये मुख्यमंत्री का अधिकार है, मुख्यमंत्री सुप्रीम हैं. अगर वो CID का चार्ज लेना चाहते हैं तो ले सकते हैं.’

हालांकि विज ने एक पेंच भी बताया. उन्‍होंने कहा कि ये फैसला कैबिनेट की मंजूरी के बिना नहीं हो सकता. इससे संबंधित विधेयक विधानसभा में पास कराना होगा. इस संबंध में अभी तक कोई बैठक भी नहीं हुई है. इसलिए CID विभाग उनके पास ही है.

मंगलवार को उस समय ये पूरा विवाद खड़ा हो गया था, जब हरियाणा विधानसभा की ऑफिशियल वेबसाइट पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को खुफिया शाखा CID का प्रभार दिया गया. लेकिन सरकार द्वारा कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई.

क्‍या हैं नियम?

हरियाणा सरकार के बिजनेस अलॉकेशन रूल्‍स 1974 के अनुसार, राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर एक मंत्री को प्रभार देने के लिए एक या एक से अधिक विभागों को नियुक्त करके सरकार के बिजनेस मंत्रियों को आवंटित कर सकते हैं.

साथ ही, मुख्यमंत्री एक विभाग को एक से अधिक मंत्रियों को सौंप सकते हैं. लेकिन, इस मामले में सरकार को CID ​​को एक अलग विभाग के रूप में परिभाषित करने के लिए आवंटन नियमों में संशोधन करना होगा. कम से कम सरकार जो कर सकती है वो ये कि अनिल विज CID ​​विंग को छोड़कर होम पोर्टफोलियो का प्रभार संभालेंगे.

विज का क्‍या है तर्क?

तनातनी के बीच विज ने कहा “एक वेबसाइट पर उल्लेख मात्र मुझे CID ​​के प्रभार से विभाजित नहीं करता है”. उन्‍होंने कहा कि CID होम पोर्टफोलियो का एक अभिन्न हिस्सा है और व्यावसायिक नियमों का आवंटन इसकी तस्दीक करता है. सीएम के पास किसी भी विभाग को किसी मंत्री से वापस लेने का अधिकार है.

लेकिन ऐसा करने के लिए एक प्रक्रिया का पालन करना होगा. राज्यपाल को एक विभाग को फिर से शुरू करने के लिए मुख्यमंत्री की सलाह पर एक अधिसूचना जारी करनी होगी. गृह मंत्री के मुताबिक, जब तक मंत्रिपरिषद द्वारा संशोधन नहीं किया जाता, तब तक गृह मंत्री के साथ CID बनी रहती है.

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