जिस मुस्लिम बच्‍ची को दुर्गा के रूप में पूजा गया, उसका परिवार CAA के खिलाफ पहुंचा SC

बंगाल में हिंदू देवी दुर्गा के रूप पूजी गई मुस्लिम बच्ची फातिमा के परिवार ने CAA और NRC को बताया भेदभावपूर्ण बताया है. अदालत ने कहा कि सभी याचिकाओं पर संविधान पीठ एक साथ सुनवाई की जाएगी.

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देशभर में विरोध जारी है. इस बीच पश्चिम बंगाल में देवी दुर्गा के रूप में पूजी जाने वाली चार साल की मुस्लिम बच्ची फातिमा के मामा एमडी अहमद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैंं. याचिका में कहा गया कि सीएए, एनआरसी और एनपीआर समाज में भेदभाव की स्थिति पैदा कर रही है. हम सभी इस देश के नागरिक है, आखिर कहां से गरीब लोग अपनी नागरिकता साबित करने के लिए दस्तावेज लाएं.

अहमद ने आगे कहा कि NRC से पूरे भारत में महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी. उनकी शादी जल्दी कर दी जाती है और उनमें से ज्यादातर को भेदभाव का सामना करना पड़ता है. कुछ परिवार एक संपत्ति खरीदते हैं या महिलाओं के नाम पर बिजनेस शुरू करते हैं, इसलिए कानूनी दस्तावेज दिखाना उनके लिए एक चुनौती है.

सुप्रीम कोर्ट में सीएए के खिलाफ पहले से ही 140 से ज्यादा याचिका पेंडिंग हैं, जिस पर तुरंत स्टे लगाने से कोर्ट ने साफ इनकार करते हुए केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए चार हफ्ते का वक्त दिया है. फिलहाल अहमद की याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा चुका है. अदालत ने कहा कि सभी याचिकाओं पर संविधान पीठ एक साथ सुनवाई की जाएगी.

इस बीच बीजेपी के राज्य इकाई के महासचिव सयंतन बसु ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लाखों अवैध प्रवासी हैं. जो लोग याचिका दायर कर रहे हैं, वे ये स्वीकार करने से इंकार कर रहे हैं कि न तो हिंदू शरणार्थी हैं और न ही अवैध मुस्लिम प्रवासी भारत के नागरिक हैं. बंगाल में कम से कम 10 मिलियन अवैध प्रवासी हैं और वो उजागर होने से डरते है, लेकिन केंद्र उनकी पहचान करेगा.

 

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