कृषि बिल: 7 राज्यों में किसानों के बीच जनजागरण करेगी बीजेपी, पढ़ें पूरा प्लान

इस जनजागरण अभियान की थीम (आत्मनिर्भर किसान) रखी गई है. 25 सितंबर यानी कल शुक्रवार से बीजेपी के संस्थापक सदस्य पं दीनदयाल उपाध्याय की जन्मतिथि से लगातार 15 दिन ये विशेष जनजागरण अभियान चलाया जाएगा.

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कृषि कानून के खिलाफ जारी है किसानों का प्रदर्शन

संसद में पास हो चुके किसान बिल (Farms Bill 2020) को लेकर बीजेपी, बिल के फायदे बताने के लिए किसानों के बीच जनजागरण अभियान चलाएगी. इससे संबंधित बीजेपी ने एक सर्कुलर जारी कर अपनी राज्य इकाइयों खासकर किसान आंदोलन से प्रभावित दिल्ली-पंजाब के आसपास के छोटे बड़े 7 राज्यों को जनजागरण अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं.

दरअसल, कांग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा इसे मुद्दा बनाए जाने और नए कानून की आड़ में केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की थी. इसी को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ये जनजागरण अभियान चलाएगी.

किसानों के सड़क पर उतरने और लगातार प्रदर्शन करने वाले उत्तर भारत के राज्यों खासकर राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के प्रदेश प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश संगठन मंत्री को पत्र लिखा गया है.

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25 सितंबर से अभियान शुरू

25 सितंबर यानी कल शुक्रवार से बीजेपी के संस्थापक सदस्य पं दीनदयाल उपाध्याय की जन्मतिथि से लगातार 15 दिन ये विशेष जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा. इस जनजागरण अभियान की थीम (आत्मनिर्भर किसान) होगा.

ये है पूरा प्लान

1- प्रत्येक गांव में इसे लेकर घर-घर संपर्क योजना चलाना है.

2- प्रत्येक गांव में जनसभा का आयोजन करना है और चौपाल पर कृषि सुधारों की चर्चा करनी है .

3- प्रत्येक जिले में वेबीनार के माध्यम से बुद्धिजीवी सम्मेलन करना है.

4- आत्मनिर्भर किसान और इस ऐतिहासिक विधेयक को लेकर  किसान नेताओं एवं संगठनों के साथ इस संदर्भ में व्यापक चर्चा करनी है.

5- इन 7 राज्यों के प्रत्येक जिले में पत्रकार वार्ता का आयोजन करना है और पत्रकारों से संपर्क कर कृषि सुधार के बारे में चर्चा करनी है.

इसके अलावा पीएम नरेंद्र मोदी और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को अभिनंदन पत्र भी भेजने को कहा गया है. कृषि सुधारों के प्रचार-प्रसार हेतु व्यापक स्तर पर होर्डिंग लगाए जाएं एवं प्रधानमंत्री का अभिनंदन किया जाएंगे.

बता दें कि कृषि और किसानों से जुड़े 3 बिल को लेकर संसद में विपक्षी दलों ने जबरदस्त हंगामा किया था. यहां तक कि एनडीए की सबसे पुराने घटक दल शिरोमणि अकाली दल के हरसिमरत कौर ने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया और राज्यसभा से विपक्षी दलों के 8 सांसदों को निलंबित करना पड़ा.

वहीं अब संसद का मॉनसून सत्र खत्म हो चुका है तब भी ये आंदोलन पंजाब, हरियाणा समेत दिल्ली के आसपास के इलाकों में तेजी से फैल रहा है. प्रधानमंत्री मोदी खुद और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ले लाख आश्वासन और समझाने के बावजूद कांग्रेस इसे जबर्दस्ती हवा देने में लगी है. लिहाजा बीजेपी ने अपने प्रचार तंत्र के जरिए सीधे किसानों तक पहुंचकर सच्चाई बताने के लिए कमर कस ली है.

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