किसानों की आय दोगुनी तो हुई नहीं,घट जरूर गई !

चुनावी मौसम है और किसानों की बातें खूब हो रही हैं. सरकार किसानों की आय दोगुनी करने का दावा कर रही है, तो कांग्रेस उनके कर्जे माफ करने की. लेकिन किसानों की हकीकत क्या है? कुछ नए आंकड़े आए हैं, जो पूरी व्यवस्था की पोल-पट्टी खोलने वाले हैं.

देश के किसान नाराज हैं और सरकार उनकी नाराजगी से घबराई हुई है, तो इसकी वजह है. अक्टूबर-दिसंबर 2018 में किसानी से आय 14 साल के न्यूनतम स्तर पर आ गई. इस अवधि में कृषि क्षेत्र में ग्रोथ पिछली 11 तिमाही में न्यूनतम है.  इस दौरान कृषि के क्षेत्र में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले हालांकि 2.7 प्रतिशत की ग्रोथ रेट जरूर रही, लेकिन मौजूदा महंगाई के हिसाब से अगर इसे समायोजित करें, तो ये दर 2.04 प्रतिशत ही है. ये कमी कृषि क्षेत्र के उत्पादों की कीमतों में 0.61 प्रतिशत की गिरावट की वजह से है. और ये सारी चीजें सरकार के लिए चिंता की बड़ी वजह है.

केंद्रीय सांख्यिकी ऑफिस के 2011-12 के बेस इयर के अनुसार 2.04 प्रतिशत की ये विकास दर 2004 के बाद (इस तिमाही में) सबसे खराब है. 2004 में अक्टूबर-दिसंबर के दौरान कृषि सेक्टर में बेहद खराब, माइनस 1.1 प्रतिशत ग्रोथ दर्ज किया गया था. हालांकि तब (2004 में) वो आकलन 1999-2000 जीडीपी सीरीज (बेस इयर) के आधार पर किया गया था.

दरअसल, पिछले काफी समय से कृषि सेक्टर में ग्रोथ रेट की स्थिति अच्छी नहीं चल रही है. जो ग्रोथ रेट हम देख रहे हैं उसकी तुलना अगर 2011-12 की कीमतों के आधार पर करते हैं, तो वह और भी कम नजर आता है. इसे हम नीचे दिए गए आंकड़ों के जरिये समझ सकते हैं :

सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को लेकर चल रही है. किसानों को तमाम अन्य सुविधाएं देने की बात सरकार भी कर रही है और विपक्ष भी. सरकार ने कमजोर किसानों (2 हेक्टेयर तक जमीन वाले) को 6 हजार रुपये सालाना कैश देने की घोषणा कर पहली किस्त भी जारी कर दी है. लेकिन कृषि सेक्टर को लेकर लंबी अवधि की योजना न होने से ये सारे उपाय सतही ही साबित हुए हैं.

खास बात ये है कि इस बार का बजट पेश करते हुए पीयूष गोयल ने माना था कि किसानों की आय में कमी आई है. हालांकि तब उन्होंने कहा था कि अंतराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में गिरावट और देश के अंदर खाद्य मुद्रास्फीति की वजह से किसानों की आमदनी में ये गिरावट आई है. तब दावा ये भी किया गया था कि 22 फसलों पर एमएसपी बढ़ाने से किसानों को फायदा होगा, लेकिन ज्यादा कुछ बदलाव दिख नहीं रहा है.

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