Article 370: रोते हुए बोले फारूक अब्दुल्ला, मेरी जान खतरे में है, फैसले के खिलाफ जाऊंगा कोर्ट, देखें Video

फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) ने मोदी सरकार को घेरते हुए कहा कि इन लोगों ने हमें नज़रबंद किया है. कश्मीर पर लिया गया फैसला अलोकतांत्रिक है.

श्रीनगर: जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah)  ने कहा कि कश्मीर पर जो केंद्र की सरकार ने किया है, वह सरासर गलत है. केंद्र सरकार मेरी ह्त्या करानी चाहती है.

फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) ने मोदी सरकार को घेरते हुए कहा कि इन लोगों ने हमें नज़रबंद किया है. कश्मीर पर लिया गया फैसला अलोकतांत्रिक है. मैं इस फैसले के विरोध में कोर्ट जाऊंगा. फारूक ने कहा कि ये वो भारत नहीं है, जिसे मैं जानता हूं. मैं संसद जाना चाहता था पर मुझे यहां नज़रबंद कर दिया गया. हम पत्थरबाज़ नहीं हैं. 370 के फैसले के खिलाफ हम चुप नहीं रहेंगे.

गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कहा है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ( Farooq Abdullah ) हाउस अरेस्ट में नहीं हैं. वो लोकसभा में फारूक अब्दुल्ला को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दे रहे थे. कश्मीर को विशेष प्रावधान देने वाले Article 370 के सभी प्रावधान खत्म करने के संकल्प पर बहस के दौरान अमित शाह ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला आजाद हैं.

अमित शाह ने कहा, उन्हें कनपटी पर गन लगाकर हम बाहर नहीं निकाल सकते. वो स्वतंत्र हैं. श्रीनगर में हैं. आपलोग चाहें तो हालचाल ले सकते हैं.

इससे पहले कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने आर्टिकल 370 और जम्मू-कश्मीर को केंद्रप्रशासित क्षेत्र बनाने के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान फारूक अब्दुल्ला के बारे में जानकारी मांगी.

उधर फारूक अब्दुल्ला ने श्रीनगर में कई गंभीर आरोप लगाए. पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अमित शाह के बयान से पहले तक उन्हें घर से नहीं निकलने दिया जा रहा था. नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने आरोप लगाया, कश्मीर जल रहा है. उन लोगों ने राज्य के लोगों की आवाज दबा दी है. मैं चुप नहीं रह सकता. फारूक अब्दुल्ला भावुक हो गए और कहा – ये वो भारत नहीं है जिसमें मैं विश्वास रखता हूं.

इससे पहले पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लिखा, ‘राष्ट्रीय अखंडता को बनाए रखने के लिए जम्मू-कश्मीर के एकतरफा टुकड़े नहीं किए जा सकते. इसके लिए संविधान को ताक पर रख कर चुने हुए प्रतिनिधियों को जेल में नहीं डाला जा सकता. देश लोगों से बनता है न कि जमीन और जमीन से. कार्यकारी शक्तियों का दुरुपयोग हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है.’