जम्मू-कश्मीर को फिर से मिले विशेष राज्य का दर्जा, गुपकार बैठक में बोले फारूक अब्दुल्ला

नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को फिर से विशेष राज्य का दर्जा मिले. हम इस मुद्दे पर राजनीतिक समाधान की मांग करते हैं.

Gupkar team jammu kashmir

जम्मू-कश्मीर में गुरुवार को गुपकार घोषणा (Gupkar Declaration) से जुड़े लोगों की बैठक हुई. इस दौरान नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को फिर से विशेष राज्य का दर्जा मिले. हम इस मुद्दे पर राजनीतिक समाधान की मांग करते हैं.

उन्होंने कहा कि जिन नेताओं को जेल हुई है उन्हें रिहा किया जाना चाहिए. नेताओं की नजरबंदी गैरकानूनी और अलोकतांत्रिक थी. कश्मीर का मसला बातचीत से हल हो सकता है. बता दें कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने और नेताओं की रिहाई के बाद ये पहली बड़ी बैठक है.

‘गुपकार घोषणा’ से जुड़े लोगों की बैठक का जम्मू-कश्मीर में विरोध होना शुरू हो गया है. आज डोगरा फ्रंट के कार्यकर्ताओं ने बैठक का विरोध किया है.

जम्मू-कश्मीर बीजेपी प्रमुख रविंदर रैना ने कहा कि गुपकार एजेंडा, पाकिस्तान का एजेंडा है. किसी भी कीमत पर हम जम्मू-कश्मीर 370 लागू नहीं होने देंगे.

क्या है गुपकार घोषणा

गुपकार घोषणा (Gupkar Declaration) नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष के गुपकार स्थित आवास पर चार अगस्त, 2019 को हुई एक सर्वदलीय बैठक के बाद जारी प्रस्ताव है. इसमें कहा गया था कि पार्टियों ने सर्व-सम्मति से फैसला किया है कि जम्मू कश्मीर की पहचान, स्वायत्तता और उसके विशेष दर्जे को संरक्षित करने के लिए वे मिलकर प्रयास करेंगी.

इस समझौते में जम्मू कश्मीर की 6 बड़ी पार्टियां (एनसी, पीडीपी, कांग्रेस और तीन अन्य) शामिल हैं. बता दें कि गुपकार घोषणा के ठीक अगले दिन जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया गया था और जम्मू कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था.

अब गुपकार घोषणा को एक तरह के पुनर्जीवित करने का काम किया जा रहा. अब इसपर साइन करनेवाली पार्टियों के सदस्य चाहते हैं कि कश्मीर को उसका स्पेशल स्टेटस वापस दिलाया जाए. यानी अनुच्छेद 370 को फिर से लागू किया जाए. दरअसल, महबूबा मुफ्ती की रिहाई के बाद से यह चर्चा होने लगी थी कि क्या गुपकार समझौते के तहत अनुच्छेद 370 को फिर मुद्दा बनाया जाएगा. अब मीटिंग बुलाने के पीछे यह बड़ी वजह लग भी रही है.

क्या गुपकार समझौते के साथ है जम्मू-कश्मीर की जनता?

गुपकार समझौते को लेकर राजनीतिक पार्टियां भले उत्साहित हों लेकिन जम्मू कश्मीर की जनता की प्रतिक्रिया वैसी बिल्कुल नहीं है. दरअसल, जब गुपकार समझौते का ऐलान किया गया और फिर अगले दिन अनुच्छेध 370 हटा तो इन पार्टियों को उम्मीद थी कि जनता उनका साथ देगी और बड़े पैमाने पर प्रदर्शन आदि होंगे. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.

गुपकार समझौते की सफलता और मंशा पर शक इसलिए भी होता है क्योंकि जम्मू से कोई भी प्रतिनिधि इसमें शामिल नहीं है, और ऐसा भी नहीं है कि जम्मू कश्मीर की सभी पार्टियां इसे सपोर्ट कर रही हैं. जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी (JKAP) ने अगस्त महीने में पीएम मोदी, अमित शाह से मुलाकात के बाद गुपकार घोषणा पर समर्थन से इनकार कर दिया था. एक्सपर्ट मानते हैं कि यह कश्मीर की पुरानी पार्टियों की एक कोशिश है जिससे वे राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बनी रह सकें.

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