कश्मीरी नहीं मानते खुद को भारतीय, चाहते हैं चीन उन पर शासन करे : फारूक अब्दुल्ला

फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) का कहना है कि कश्मीरी नागरिकों को सरकार पर भरोसा नहीं है. वो चाहते हैं कि चीन (China) उन पर शासन करे.

  • TV9 Digital
  • Publish Date - 4:30 pm, Thu, 24 September 20
फारूक अब्दुल्ला
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जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) ने बुधवार को कहा कि इस वक्त कश्मीर के लोग खुद को भारतीय नहीं मानते और चाहते हैं कि चीन (China) उन पर शासन करे. द वायर को दिए एक इंटरव्यू में फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीरियों को ‘गुलाम’ बताया, जिनके साथ देश में दूसरे दर्जे के नागरिक जैसा व्यवहार हो रहा है.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के चीफ ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर के लोगों ने पिछले साल अगस्त में आर्टिकल 370 को हटाने के फैसले को स्वीकार कर लिया. उन्होंने दावा किया कि अगर कश्मीर की सड़कों से सेना को हटा लिया जाए तो इस फैसले के खिलाफ बड़ी संख्या में प्रोटेस्ट करते हुए लोग सामने आएंगे.

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बता दें कि केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को संविधान के आर्टिकल 370 को जम्मू-कश्मीर से हटाने का फैसला लिया था, जिसके तहत राज्य को विशेष दर्जा प्राप्त था. सरकार की ओर से कहा गया था कि आर्टिकल 370 ने राज्य के विकास को रोक दिया. इसकी वजह से राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योगों के विकास रुक गए और यह घाटी में आतंकवाद को रोकने में भी सहायक नहीं है.

आर्टिकल 370 हटाने के बाद घाटी में CRPC की धारा 144 लागू कर दी गई थी, जिसके तहत पांच से अधिक लोगों के एक स्थान पर इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई थी.

प्रधानमंत्री ने दिया धोखा

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीरियों को अब सरकार पर कोई भरोसा नहीं है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने धोखा दिया है. अब्दुल्ला ने कहा कि जब उन्होंने घाटी में बढ़ते सैनिकों की संख्या को लेकर सवाल किया तो उन्हें बताया गया कि यह केवल सुरक्षा कारणों से किया जा रहा है.

अब्दुल्ला ने कहा कि आर्टिकल 370  के निरस्त होने से ठीक 72 घंटे पहले उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक और नेता शेख अब्दुल्ला के साथ प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी. उन्होंने राज्य में आर्टिकल 370 और 35A जारी रखने के बारे में आश्वासन दिया था. उन्होंने कहा कि मोदी ने आर्टिकल 370 और 35A के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा था.

आर्टिकल 370 के हटने के बाद अपने पहले इंटरव्यू में अब्दुल्ला ने कहा था कि उनकी पार्टी सभी लोकतांत्रिक माध्यमों से जम्मू-कश्मीर को दिए गए विशेष दर्जे में बदलाव के लिए संघर्ष जारी रखेगी.