फाइटर पायलट के दिमाग का खून सुखा देती है हवा में उड़ान!

हमले के दौरान फाइटर पायलट के दिमाग का खून सूख जाना चिंता का विषय है. वायुसेना कई तकनीकों से लैस हो चुकी है, लेकिन आधुनिक तकनीकों के बावजूद अगर फाइटर पायलट इस तरह की समस्या का सामना करते हैं तो इसे गंभीरता से लेकर कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है.
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नई दिल्ली: वायुसेना के फाइटर पायलट किसी इवेंट में करतब दिखाते समय या युद्ध के दौरान बहुत ही जांबाजी के साथ उड़ान भरते हैं और अपना शानदार प्रदर्शन करके दिखाते हैं, लेकिन क्या कभी किसी ने सोचा है कि यह काम कितना जोखिम भरा होता है. खुले आसमान में फाइटर पायलट्स को देखना बहुत ही रोमांचकारी होता है, पर आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि जब पायलट आसमान में होते हैं तो उनके दिमाग का खून सूखने लगता है.

यह सब ग्रेविटेशनल फोर्स के कारण होता है. पायलट जब हवा में अपने प्लेन को मोड़ता है, तो उस दौरान पायलट पर ग्रेविटेशनल फोर्स का अत्याधिक असर पड़ता है. दिमाग का खून पैरों की तरफ चला जाता है, जिसके कारण दिमाग में खून की कमी हो जाती है. दिमाग में खून की कमी के कारण फाइटर पायलट की आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होने लगती है.

फाइटर पायलट्स को इस प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े, इसलिए पायलट को एंटी ग्रेविटी तकनीक से मदद पहुंचाई जाती है और यह तकनीक एंटी ग्रेविटी सूट है. इसे पहनने के बाद फाइटर पायलट जब प्लेन को मुड़ता है तो उस सूट में हवा भरने लगती है. हवा का दबाव ज्यादा होने के कारण पायलट के दिमाग से खून नीचे नहीं उतर पाता और जब प्लेन सीधा होता है तो हवा अपने आप बाहर निकल जाती है. यह सूट कमर से नीचे के हिस्से के लिए होता है.

इसके अलावा आपको यह भी बता दें कि वायुसेना के पायलट जब हमले के लिए निकलते हैं तो उड़ान भरने का ग्रीन सिग्नल मिलने के 2 से 15 मिनट के बाद वे उड़ान भरते हैं. अगर वे हमले के बजाए नॉर्मली उड़ान भरते हैं, तो यह समय बढ़कर 30 मिनट हो जाता है.

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