जामिया-शाहीन बाग प्रोटेस्ट में शामिल हुए अनुराग कश्यप, बोले- अंगद के पैर जैसे जमे रहना

जामिया में अनुराग कश्यप ने कहा कि यह जो आंदोलन हो रहा है वो कही ना कहीं यह एहसास दिलाता है की हम हैं. भेड़ बकरियों की तरह हम नहीं जा सकते.

  • TV9.com
  • Publish Date - 7:11 pm, Fri, 14 February 20

नई दिल्ली: नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी (NRC) का लगातार विरोध कर रहे फिल्म डायरेक्टर अनुराग कश्यप ने जामिया और शाहीन बाग के प्रोटेस्ट पर शामिल हुए. अनुराग कश्यप ने जामिया में कहा कि आप लोग बस जमे रहो आप प्यार से जमे रहो. आपको हिंसा नहीं करनी. वो लोग प्रोवोक करेंगे पर आपनें नहीं होना. उन लोगों को प्यार आता ही नहीं है.

जामिया में अनुराग कश्यप ने कहा कि यह जो आंदोलन हो रहा है वो कही ना कहीं यह एहसास दिलाता है की हम हैं. भेड़ बकरियों की तरह हम नहीं जा सकते. उन्होंने कहा कि यह आंदोलन जामिया से चलकर हर जगह पहुंचा है. हमें अपना संविधान और अपना हक़ वापस लेना है.

आगे उन्होंने कहा कि यह धैर्य की लड़ाई है और हम रुकेंगे नहीं. आप कहते हो की यह देश के लोगों के लिए नहीं हैं पर गृहमंत्री कुछ और कहते हैं. सब आपके साथ हैं, बहुत लोग आपके साथ खड़े और सब देख रहे हैं की क्या चल रहा है. हमें उनपर विश्वास नहीं है क्यों की वो बोलते कुछ है और करते कुछ हैं.

अनुराग कश्यप ने कहा, “आप ऐसी सरकार से लड़ रहे हैं जो जामिया में अंदर घुस जाते हैं और जेएनयू में बाहर रहते है. जो गार्गी कॉलेज के मोलेस्टेरो 40 घंटे में जमानत दे देती है पर कफील खान को जेल में रखती है. जो शाहीन बाग़ में बच्चे के मरने पर सवाल उठाती है और कर्नाटक में बाबरी विध्वंस पर हुए नाटक पर चुप रहती है. हमे पारदर्शी सरकार चाहिए. सरकार हमसे बात करे पर यहां मोनोलॉग चलता है.

मीडिया पर भड़कते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया ने जितना हमारे समाज का नुकसान किया है उतना किसी ने नहीं किया है हमारे गृहमंत्री किसी की नहीं सुनते है. आवाम अपनी बात पर अंगद के पाव की तरह जमे रहना है.

शाहीन बाग में क्या बोले अनुराग कश्यप

जामिया के बाद अनुराग कश्यप शाहीन बाग पहुंचे जहां उन्होंने सीएए एनआरसी के खिलाफ अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि मैं बहुत दिनों से शाहीन बाग आना चाह रहा था और दादी मां से मिलना चाह रहता था. आप लोगों से इतनी हिम्मत मिलती है कि आप लोगों को देखकर इतने शाहीन बाग बन गए.

उन्होंने आगे कहा कि सरकार से मैं डिसअग्रीमेंट करता था. मैं एक समय देश छोड़ कर चला गया था. दिसंबर में जब जामिया पर अटैक हुआ तो ये लोग आपको आक्रोशित करते हैं. आपकी भीड़ में अपने लोगों को खड़ा कर भड़काएगें वो हिंसा करना चाहता हैं. ये लंबी लडाई है ताक़त को अपने हाथ में रखना चाहते हैं.

अनुराग कश्यप ने कहा कि मैं भरोसा नहीं करता की ये लोग क्या कहते है. सरकार के किसी भी ऐक्शन में जो कहते है करते नहीं हैं. इंडिया का आईडिया लोगों से आता है सीमाओं से इंडिया नहीं है. सरकार यहां आए और बात करे. हमें ग़लतफ़हमी है तो आप आएं और दूर करें.