‘सुरक्षित हाथों में है Economy, चिंता की बात नहीं श्रीमान’, सीतारमण का रामचंद्र गुहा पर पलटवार

निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने पलटवार करते हुए कहा, "अर्थव्यवस्था निश्चित रूप से सुरक्षित हाथों में है. चिंता करने की जरूरत नहीं है श्रीमान गुहा. मौजूदा राष्ट्रीय चर्चा पर विचारों का संज्ञान लेना + जिम्मेदारी से अपना काम करना कोई विशेष बात नहीं है."
historian Ramchandra Guha, ‘सुरक्षित हाथों में है Economy, चिंता की बात नहीं श्रीमान’, सीतारमण का रामचंद्र गुहा पर पलटवार

वित्त मंत्री (Finance Minister) निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) और इतिहासकार रामचंद्र गुहा (Ramchandra Guha) गुरुवार को टि्वटर पर भिड़ गए. सीतारमण ने गुहा से कहा कि उन्हें अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह ‘सुरक्षित हाथों’ में है.

इससे पहले, गुहा ने अपने ट्वीट में ब्रिटिश लेखक फिलिप स्प्राट के 1930 के दशक में दिए एक कथन का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘गुजरात आर्थिक रूप से मजबूत है, लेकिन सांस्कृतिक रूप से पिछड़ा है.’

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का ट्वीट

गुहा के इस ट्वीट पर बीजेपी के कई नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की. गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा कि भारत के लोग इस तरह की ”चाल” में नहीं फंसेंगे.

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इसके बाद सीतारमण ने एक लेख का वेबलिंक पोस्ट किया जो सितंबर 2018 में प्रकाशित हुआ था. यह लेख पोलैंड सरकार द्वारा जामनगर के पूर्व नरेश महाराज जाम साहेब दिग्विजय सिंह जी जडेजा के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम से संबद्ध था. उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड के 1,000 बच्चों को शरण दी थी.


सीतारमण ने ट्वीट किया, “कम्युनिसट इंटरनेशनल से जुड़े ब्रिटेन वासी फिलिप स्प्राट ने जब यह लिखा तब गुजरात में यह हो रहा था: जामनगर… महाराजा जाम साहेब दिग्विज सिंह जी ने पोलैंड के 1000 बच्चों को बचाया #संस्कृति.”

‘साधारण इतिहासकार का ट्वीट सता रहा’

गुहा ने इसके जवाब में ट्वीट किया, “मुझे लगता कि केवल गुजरात के मुख्यमंत्री ने टिप्पणी की लेकिन अब ऐसा लगता है कि वित्त मंत्री को भी एक साधारण इतिहासकार का ट्वीट सता रहा है. अर्थव्यवस्था निश्चित रूप से सुरक्षित हाथों में है.”


इस पर सीतारमण ने पलटवार करते हुए कहा, “अर्थव्यवस्था निश्चित रूप से सुरक्षित हाथों में है. चिंता करने की जरूरत नहीं है श्रीमान गुहा. मौजूदा राष्ट्रीय चर्चा पर विचारों का संज्ञान लेना + जिम्मेदारी से अपना काम करना कोई विशेष बात नहीं है. किसी भी रूप से इतिहास में रूचि एक बढ़त है. निश्चित रूप से आपके जैसे बुद्धिजीवी व्यक्ति को यह समझ में आना चाहिए.”

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