CAA: सीतारमण का पलटवार, 6 साल में पाकिस्‍तानी मुस्लिमों समेत 2,838 को दी नागरिकता

निर्मला सीतारमण ने दावा किया कि 2014 तक पाकिस्‍तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के 566 मुसलमानों को देश की नागरिकता मिली. सिर्फ 2016-18 में ही मोदी सरकार ने 1595 पाकिस्तानी और 391 अफगान मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी.

देशभर में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को विशेष समुदाय के खिलाफ भेदभावपूर्ण बताकर विपक्ष की ओर से किए जा रहे विरोध के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सीएए पर बड़ा बयान दिया है. रविवार को निर्मला सीतारमण ने कहा कि पिछले छह साल में 2, 838 पाकिस्तानी, 914 अफगानिस्तानी, 172 बांग्लादेशी शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी गई. इनमें मुसलमान शरणार्थी भी शामिल हैं.

वित्त मंत्री के मुताबिक, 1964 से 2008 तक श्रीलंका के चार लाख तमिलों को भी नागरिकता दी गई. 2014 तक पाक, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के 566 मुसलमानों को भी देश की नागरिकता मिली थी. सिर्फ 2016-18 में ही मोदी सरकार ने 1595 पाकिस्तानी और 391 अफगान मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दी. वर्ष 2016  में ही अदनान सामी के अलावा तस्लीमा नसरीन को भारतीय नागरिकता दी गई है, जो ये साबित करता है कि हमारे खिलाफ सभी आरोप गलत हैं.

वित्त मंत्री ने दुख जताते हुए कहा, ‘ये सभी शरणार्थी पिछले 50-60 सालों से यहां रह रहे हैं. अगर आप इन शिविरों में जाएंगे तो आपकी रूह कांप उठेगी. श्रीलंकाई शरणार्थियों के साथ भी ऐसी ही स्थिति है और वो इन शिविरों में रहने को मजबूर हैं. उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया.

निर्मला सीतारमण ने सीएए को असंवैधानिक बताने वाले  कुछ राज्यों को संसद में पारित कानून को लागू करने को कहा.  राज्य विधानसभा ने सीएए के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया. ये एक राजनीतिक बयान देने जैसा है. हम समझ सकते हैं. लेकिन ये कहना कि वो इसे लागू नहीं करेंगे, तो यह कानून के खिलाफ है.

बता दें, केरल सरकार ने पिछले हफ्ते ही सीएए के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. जिसे संविधान के खिलाफ घोषित करने की मांग की थी. पंजाब सरकार ने भी सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया.

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