FinCEN लीक: अमेरिका के रडार पर था दाऊद का मुख्य फाइनेंसर, जैश-लश्कर को भी करता था फंडिंग

अमेरिकी नियामक फिनसेन (FinCEN) ने कैसे दाऊद इब्राहिम के पाकिस्तानी फाइनेंसर का भंडाफोड़ किया था यह सामने आया है. वह आतंकी संगठन जैसे लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद को भी फंडिंग करवाता था.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 11:56 am, Mon, 21 September 20

पाकिस्तान में छिपे आतंकी दाऊद इब्राहिम (Dawood Ibrahim) से जुड़ा एक बड़ा खुलासा हुआ है. पता चला है कि उसका पाकिस्तानी फाइनेंसर किस तरह से मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल था. इसका भंडाफोड़ अमेरिकी नियामक फाइनेंशल क्राइम इन्फोर्समेंट नेटवर्क या फिनसेन (FinCEN) ने किया था. यह पूरा जाल पाकिस्तानी नागरिक अल्ताफ खानानी ने बुना हुआ था जो आतंकी संगठनों का पैसा इधर से उधर करता था.

अल्ताफ खानानी पर सबसे पहले शक स्टैंडर्ड चाटर्ड बैंक की शिकायत के बाद हुआ था. उसके बाद अल्ताफ का नाम फिनसेन (FinCEN) की संदिग्ध गतिविधि रिपोर्ट (SAR) में शामिल किया गया.

दाऊद के साथ-साथ अलकायदा, तालिबान को भी दिया पैसा

संदिग्ध गतिविधि रिपोर्ट (SAR) से पता चला कि अल्ताफ ने हर साल करीब 16 बिलियन डॉलर तक रुपया इधर से उधर किया. यह पैसा नशीली दवाएं बेचने वाला समूह और अलकायदा, तालिबान जैसे आतंकी समूह के लिए था.

अल्ताफ को 2015 में पनामा एयरपोर्ट से गिरफ्तार भी किया गया था. फिर जुलाई 2020 में उसे अमेरिकी इमिग्रेशन डिपार्टमेंट को सौंपा गया था. फिलहाल साफ नहीं है कि वह पाकिस्तान में है या फिर उसे यूएई भेजा गया. अल्ताफ के दाऊद से भी कनेक्शन हैं इसका पता भी अमेरिका ने लगाया था. फिर यूएस ऑफिस ऑफ फॉरन एसेट कंट्रोल (OFAC) ने उसपर कई पाबंदियां लगाई थीं.

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बाद में अल्ताफ से जुड़ी कई और संस्थाओं पर पाबंदियां लगाई गई थीं. इसमें दुबई की मजाका जनरल ट्रेडिंग शामिल थी. मजाका कंपनी ने दिल्ली की रंगोली इंटरनैशनल प्राइवेट लिमिटिड से भी व्यापार किया था. यह कंपनी वैसे तो कपड़ों का व्यापार करती है. इनकी 70 लेन-देन पर शक था. हालांकि, रंगोली कंपनी फिलहाल ऐसी किसी लेन-देन से इनकार कर रही है. उसका यह भी कहना है कि मजाका ये उसने व्यापार ही नहीं किया.

क्या है FinCEN लीक

FinCEN खुलासे में गुप्त वित्तीय लेनदेन और बैंकिंग से जुड़े राज सामने आए हैं. बता दें कि अमेरिकी नियामक फिनसेन (FinCEN) संदिग्ध गतिविधि रिपोर्ट (SAR) नाम से सीक्रेट दस्तावेज तैयार करता है. इसमें 1999 से 2017 के बीच की 2,121 संदिग्ध गतिविधियों का जिक्र है. इनके जरिए 2.099 ट्रिलियन डॉलर का संदिग्ध लेनदेन हुआ.

कैसे आता है SAR में नाम

दरअसल, जब किसी बैंक को किसी लेन-देन पर शक होता है. तो वह इसकी शिकायत शिकायत फिनसेन (FinCEN) से करता है. छह से ज्यादा बैंकों ने ऐसे लेनदेन पर शक जाहिर करते हुए शिकायत दी थी. इस शिकायत को बहुत गोपनीय रखा जाता है. अकाउंट होल्डर को भी इसकी जानकारी नहीं दी जाती.