पैंगोंग क्लैश से पहले अप्रैल में ही LAC पर चीनी सैनिकों ने शुरू कर दी थी हरकत

स्थिति की गंभीरता को पहली बार तब स्वीकार किया गया जब 17-18 मई के बाद चीनी सैनिक (Chinese Troops) फॉक्सहोल पॉइंट में चले गए थे. जो कि पैंगोंग में फिंगर 4 पर नॉर्थबैंक के दक्षिणी छोर पर और ग्रीन टॉप पर था.
first movement in mid april on LAC Before Pangong clash, पैंगोंग क्लैश से पहले अप्रैल में ही LAC पर चीनी सैनिकों ने शुरू कर दी थी हरकत

LAC पर चीनी सैनिको की मौजूदगी मिड अप्रैल में सबसे पहले हुई थी, इसके दो हफ्ते बाद 4-6 मई को पैंगोंग त्सो में भारत-चीन सैनिकों के बीच फेसऑफ की घटना सामने आई. हालांकि सेना का कहना है कि अप्रैल में चीनी सैनिकों की गतिविधि की घटना की जानकारी सामने नहीं आई वहीं मई में इंफ्रास्ट्रक्चर कंस्ट्रक्शन की बात का ही उल्लेख किया गया.

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक एक खुफिया अधिकारी ने कहा कि अप्रैल के मिड की पहली रिपोर्ट के बाद डेमचोक के विपरीत क्षेत्रों से उत्तर की ओर सैकड़ों चीनी भारी सैन्य वाहनों के साथ देखे जाने के इनपुट मिले. इन रिपोर्ट्स ने उच्चतम स्तर पर इंटेलीजेंस सेटअप की तरफ इशारा किया कि लद्दाख में गतिविधि हो रही है.

चीनी आर्मी ने विश्वास तोड़ा

हालांकि सेना का कहना है कि चीनी सेना ने भरोसा तोड़ा. उन्होंने प्रशिक्षण अभ्यास की आड़ में LAC के नजदीक कंस्ट्रक्शन किया. खुफिया अधिकारी ने 15 मई को सेना प्रमुख के दिए गए स्टेटमेंट को कोट किया, जिसमें कहा गया था कि पूर्वी लद्दाख और सिक्किम में LAC के साथ भारतीय-चीनी सैनिकों की झड़पें दिनचर्या का हिस्सा बन गई हैं.

सिक्किम और नाकुला में हुईं शुरुआती झड़पें

रिपोर्ट के मुताबिक पैंगोंग में पहली झड़प 5-6 मई को हुई थी जिसमें भारतीय और चीनी दोनों तरफ के सैनिक घायल हुए थे. 9 मई को सिक्किम में नाकुला में एक और झड़प हुई. अधिकारी ने कहा कि सेना द्वारा स्थिति की गंभीरता को पहली बार तब स्वीकार किया गया जब 17-18 मई के बाद चीनी सैनिक फॉक्सहोल पॉइंट में चले गए थे. जो कि पैंगोंग में फिंगर 4 पर नॉर्थबैंक के दक्षिणी छोर पर और ग्रीन टॉप पर था. जिसके बाद 18 मई को पहली बार मीटिंग के जरिए लद्दाख की सिचुएशन पर बात की गई.

अप्रैल में नहीं थी पीएलए की टुकड़ी की खबर

सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “अप्रैल में हमारे साथ किसी भी बड़े पैमाने पर पीएलए टुकड़ी आंदोलन और तैनाती की कोई रिपोर्ट नहीं थी. कुछ चीनी सैन्य वाहनों की आवाजाही के बारे में पहली रिपोर्ट केवल मई में प्राप्त हुई थी, जो बुनियादी ढांचा निर्माण गतिविधियों से संबंधित थी.

चीनी सैनिक प्रशिक्षण अभ्यास का हिस्सा थे और फिर…..

अधिकारी ने कहा कि “चीनी सैनिक एक प्रशिक्षण अभ्यास का हिस्सा थे उन्हें बाद में एलएसी पर गतिरोध स्थलों पर भेज दिया गया. ये अभ्यास हर गर्मी में नियमित होते हैं और लंबे समय से यह समझ है कि दोनों सेनाएं अभ्यास के बाद अपने ठिकानों पर वापस चली जाती हैं. यह एक स्थापित मानदंड है, जिसका पालन सालों तक किया जाता रहा है.

कोरोना के कारण रिजर्व डिवीजन ब्रिगेड नहीं लाई गई

इस साल हम फिर से पीएलए द्वारा इन अभ्यासों से अवगत थे, लेकिन चीन द्वारा विश्वास तोड़ा जाएगा ये नहीं पता था, क्योंकि उन्होंने इन सैनिकों को गतिरोध स्थलों पर भेज दिया था. सेना हर साल गर्मियों में प्रशिक्षण अभ्यास के लिए लद्दाख में अपनी रिजर्व डिवीजन की ब्रिगेड लाती थी, लेकिन इस साल कोविड -19 महामारी के प्रकोप के बाद राष्ट्रीय लॉकडाउन के कारण इसे रोक दिया गया था.

जबकि लेह-आधारित डिवीजन और स्वतंत्र पैदल सेना और बख्तरबंद ब्रिगेड की टुकड़ियां चीनी इनग्रेसियों का जवाब देने के लिए जल्दी से आगे बढ़ीं, अतिरिक्त सैन्य टुकड़ियों को मई में दूसरे हिस्सों में पहुंचाया गया.

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