तीन तलाक कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची पहली मुस्लिम महिला, कहा- बढ़ सकती हैं झूठी शिकायतें

मुस्लिम महिला के अलावा जमीयत उलेमा हिंद (Jamiat Ulama Hind), ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB), मुस्लिम एडवोकेट्स एसोसिएशन संगठनों समेत दो और लोगों ने कोर्ट में इस कानून (Triple Talaq Law) के खिलाफ अर्जी दी थी.
First muslim woman to challenge triple talaq law, तीन तलाक कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची पहली मुस्लिम महिला, कहा- बढ़ सकती हैं झूठी शिकायतें

तीन तलाक को लेकर बने नए कानून के खिलाफ पहली मुस्लिम महिला सुप्रीम कोर्ट पहुंची है. केरल की वकील ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में तुरंत तलाक की इस्लामिक चलन को आपराधिक बनाने वाले कानून को चुनौती दी है. यह कानून बीते साल संसद में काफी बहसों के बाद बनाया गया था.

नूरबीना रशीद ने 6 जुलाई को प्रोटेक्शन ऑफ मैरिज एक्ट को चुनौती दी. इस कानून के मुताबिक तलाक-ए-बिद्दत यानी तुरंत तीन तलाक दिए जाने पर शौहर के लिए तीन साल की सजा का प्रावधान है. देश के मुस्लिम समाज के एक तबके में इसका प्रचलन रहा है. रशीद ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अर्जी में कहा है कि शौहर को कैद कर दिए जाने से औरतों की सुरक्षा का मकसद हासिल नहीं किया जा सकता.

देखिए NewsTop9 टीवी 9 भारतवर्ष पर रोज सुबह शाम 7 बजे

जस्टिस एनवी रामन्ना की अगुवाई में गठित सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यों वाली बेंच ने सोमवार को तीन तलाक कानून की वैधता को चुनौती देने वाली 9 अर्जियों के साथ नूरबीना की अर्जी भी स्वीकार की है. कोर्ट ने इस बारे में केंद्र को नोटिस भी जारी किया है. हालांकि, इन अर्जियों को सुनवाई के लिए फिलहाल लिस्टेड नहीं किया गया है.

कई मुस्लिम संगठनों ने भी दी अर्जी

मुस्लिम महिला के अलावा जमीयत उलेमा हिंद, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, मुस्लिम एडवोकेट्स एसोसिएशन संगठनों समेत दो और लोगों ने कोर्ट में इस कानून के खिलाफ अर्जी दी थी. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जियों में तीन तलाक कानून को काफी सख्त और असंवैधानिक बताते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की गई.

जुलाई 2019 में संसद को दोनों सदनों से पास इस कानून को लेकर विपक्षी दलों ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी. विपक्ष के नेताओं ने इसे मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश करार दिया था. वहीं केंद्र ने मुस्लिम महिलाओं को जेंडर जस्टिस मिल पाने के लिए इसे जरूरी बताया था.

बढ़ सकती है झूठी शिकायतें

रशीद ने अपनी अर्जी में कानून के प्रावधान कि महिला के रिश्तेदार भी शिकायत कर सकते हैं पर संदेह जताया. अर्जी में कहा गया है कि इस से झूठी शिकायतें बढ़ सकती हैं. इसकी वजह से शादी का रिश्ता ही कमजोर पड़ जाएगा. जिसका नुकसान महिलाओं को ही होगा. अर्जी में तीन तलाक मामले में शौहर को दी जाने वाली आपराधिक सजा को भी ज्यादती बताया गया है.

देखिये #अड़ी सोमवार से शुक्रवार टीवी 9 भारतवर्ष पर शाम 6 बजे

Related Posts