नदी के नीचे दौड़ेगी भारत की ये ट्रेन, अभी इन देशों में हैं सबसे लंबे अंडर वॉटर टनल्‍स

भारत में जल्द ही नदी के नीचे भी मेट्रो ट्रेन दौड़ेगी. देश का ये पहला प्रोजेक्ट कोलकाता में लगभग पूरा हो गया है.
india fist under water train, नदी के नीचे दौड़ेगी भारत की ये ट्रेन, अभी इन देशों में हैं सबसे लंबे अंडर वॉटर टनल्‍स


कोलकाता: भारत की पहली अंडर वॉटर मेट्रो ट्रेन जल्द ही कोलकाता में हुगली नदी के नीचे चलना शुरू होगी. रेल लाइन काम लगभग पूरा हो चुका है. रेलमंत्री पीयूष गोयल ने एक वीडियो ट्वीट कर यह जानकारी दी है.

उन्होंने इसका एक वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा, ‘भारत की पहली अंडर वॉटर ट्रेन शीघ्र ही कोलकाता में हुगली नदी के नीचे चलना आरंभ होगी. उत्कृष्ट इंजीनियरिंग का उदाहरण यह ट्रेन देश में निरंतर हो रही रेलवे की प्रगति का प्रतीक है. इसके बनने से कोलकाता निवासियों को सुविधा, और देश को गर्व का अनुभव होगा.

वीडियो में बताया गया है कि पहली अंडर वॉटर कोलकाता मेट्रो सॉल्टलेक सेक्टर 5 से हावड़ा मैदान तक की यात्रा करने के लिए तकरीबन तैयार है. 2 फेस में बटी इस लाइन में फेस 1 को जल्द ही आम लोगों के लिए चालू कर दिया जाएगा.

कोलकाता वासियों के लिए ये बेहद राहत वाला कदम है. अंडर वॉटर ट्रेन को पानी से बचाने के लिए चार उच्च स्तरीय सुरक्षा कवज लगाए गए हैं. ये सुरंगें 520 मीटर लम्बी और लगभग 30 मीटर गहरी हैं और नदी के नीचे से होकर जाने वाली मेट्रो को यह सुरंग पार करने में कुल 60 सेकंड का वक्त लगेगा.

दुनिया के 5 सबसे लंबे अंडरवॉटर टनल

  • 1. सीकन टनल- 53.9 किमी

जापान की सीकन टनल दुनिया की सबसे लंबी पानी के अंदर मौजूद सुरंग है. इसकी कुल लंबाई 53.9 किमी है. ये सुरंग त्सुगारू स्ट्रेट में मौजूद है. मौसम के हाल को देखते हुए इस सुरंग का निर्माण किया गया. इसका निर्माण साल 1998 में पूरा हुआ था. इसके अंदर से ट्रेनें गुज़रती हैं.

  • 2. चैनल टनल- 37.9 किमी

ये टनल यूनाइटेड किंगडम के फ़ोकस्टोन और फ्रांस के पास-डे-कलैस को आपस में जोड़ती है. इसका आधिकारिक उद्घाटन मई साल 1994 में क्वीन एलिज़ाबेथ II ने किया था. ये सेंट्रल सर्विस टनल सभी लेन से कनेक्टेड है. इसके लिए विशेष तौर पर मेंटिनेंस और इमरजेंसी टीम गठित की गई हैं.

  • 3. टोक्यो बे एक्वा लाइन- 15 किमी

टोक्यो बे एक्वा लाइन को टोल हाइवे के नाम से भी जाना जाता है. इसका आधिकारिक उद्घाटन दिसंबर 1997 में हुआ था. इसकी प्लानिंग और निर्माण पूरा होने में करीब 31 साल लगे. ये सुरंग किसाज़ारू और कावास्की सिटी को आपस में जोड़ती है. इससे पहले दोनों शहरों के बीच सफर करने के लिए 100 किमी का रास्ता तय करना पड़ता था या फैरी का सहारा लेना पड़ता था.

  • 4. बोमलाफ्योड टनल- 7.8 किमी

नॉर्वे में मौजूद ये टनल ट्राइंगल लिंक प्रोजेक्ट का हिस्सा है. इस टनल का काम साल 1997 में शुरू हुआ था. साल 2011 तक हर दिन इस टनल से करीब 4 हज़ार वाहन गुज़रते थे. सेफ्टी मानकों की बात करें तो इसके अंदर मोबाइल फोन कवरेज, बैरियर्स और लाइट मौजूद हैं. साथ ही हर 1500 मीटर पर ट्रकों के लिए टर्निंग प्वाइंट मौजूद हैं.

  • 5. इकसुंड टनल- 7.7 किमी

ये भी नॉर्वे में मौजूद टनल है जो वहां मुख्य की मुख्य जगह को हर्डेलांडेट आइसलैंड से जोड़ती है. फरवरी 2008 में इसको आधिकारिक तौर पर खोला गया था. नॉर्वे की पब्लिक रोड एडमिनिस्ट्रेशन इसकी देखभाल करती है. रोज़ाना करीब 1000 वाहन जिनमें सामान से लदे ट्रक भी गुज़रते हैं.

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