5 बातें, जिनके दबाव में अभिनंदन को छोड़ने पर मजबूर हुए इमरान खान

भारत ने पाकिस्‍तान को अमेरिका समेत, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस के जरिये ऐसा घेरा कि चीन भी चकरा गया और मजबूरी में...

नई दिल्‍ली: कहते हैं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पाकिस्तान की सेना और आईएसआई के प्यादे हैं, लेकिन जब भारत ने पाकिस्तान में अंदर घुसकर हवाई कार्रवाई की तो जाहिर है ये पाकिस्तान की सेना को आएसआई को और उनके प्यादे समझे जाने वाले इमरान खान को पसंद नहीं आई होंगीं. लेकिन कार्रवाई वाले दिन की सुबह से लेकर आने वाले दो दिनों तक इमरान खान, सेना और आईएसआई ने जिस तरह का संयम बनाए रखने का दिखावा किया और बिना घोषित युद्ध के पाकिस्तानी सेना के हाथ लगे विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान को वापस सौंपने का फैसला किया.

पांच बातें जिन्होंने इमरान को झुकाया

1. भारत ने पाकिस्तान की सीमा पार करके अंदर जाकर जिस तरह आतंकवादी ठिकानों को नेस्तनाबूत करने का काम किया उस दौरान किसी मिलिट्री या रिहाइशी इलाके को निशाना नहीं बनाया गया. भारत ने बयान जारी करके कहा कि भारत की वायुसेना ने आतंकवाद पर एयर स्ट्राइक किया है ना कि पाकिस्तान पर इस बात को भारत ना सिर्फ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साबित करने में कामयाब रहा बल्कि इमरान समेत पाकिस्तान की सेना तक को ये बात समझ में आ गई कि वो चाह कर भी भारत पर जवाबी हमला नहीं कर सकते हैं हालांकि भारत की सीमा में घुसने की कोशिश को सीमित रख कर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और वहां की सेना ने अपने अवाम को खुश करने का काम किया और अंदर से बढ़े दबाव को काफी हद तक दूर करने की कोशिश की.

2. पुलवामा हमले के बाद जो राजनीतिक दबाव भारत की सरकार पर बना था उसका जवाब देने की कोशिशें भले देश के अंदर हमले के दिन से ही शुरू हो गई लेकिन इस दौरान भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक दवाब भी बनाने में लग गया जिसका नतीजा ये हुआ कि अमेरिका तक ने पुलवामा हमले के खिलाफ भारत की आत्मरक्षा के हक को इस्तेमाल करने की बात की. इसने इमरान खान के साथ साथ वहां की सेना तक पर एक बड़े अंतरराष्ट्रीय दबाव को बनाया.

3. बालाकोट हमले की सुबह से लेकर अब तक जिस तरह इमरान अमन की बात करते नजर आए उसकी एक और अहम वजह रही आतंकवाद. इमरान पर दबाव पड़ा कि जैश-ए-मुहम्मद के सरगना पर कार्रवाई की जाए. इस मामले को जोर देने के लिए अमेरिका समेत, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस जैसे सभी देश दबाव बनाने में कामयाब रहे और इस में चीन को भी साथ देना पड़ा हालांकि उसने मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने की बात तो नहीं की लेकिन पाकिस्तान पर आतंकवाद को लगाम लगाने की बात में उसे खुल कर बोलना जरूर पड़ा. इमरान के लिए ये इशारा काफी था कि वो सेना को अपनी खस्ताहाल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का हवाला देकर अमन के रास्ते में सहयोग की बात करे.

4. मोदी की लंबी कूटनीतिक कोशिशें जो कि उरी पर हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा हमले के बाद बालाकोट पर हमले के तौर पर अमल में लाई गई. उसके बाद अलग अंदाज में जारी रहीं उससे इमरान समेत वहां की सेना और आईएसआई पर दबाव बनाए रखा… भारत के चुनावी माहौल और पाकिस्तान में मोदी की जो मुस्लिम विरोधी छवि अब तक बनाई गई है उससे साफ जाहिर हुआ कि पाकिस्तान का बैकफुट पर रहना ही वक्त की नजाकत है. इमरान को झुकाने वाली ये अहम वजह रही.

5. जब बालाकोट हमले के अगले दिन भारत और पाकिस्तान के बीच बिना घोषित युद्ध के हवाई आमना सामना हुआ तो पूरी दुनिया में तहलका मच गया. दोनों देशों के फाइटर जेट्स आमने सामने थे… दोनों तरफ सैनिक मारे या बंधक बनाए जाने लगे थे. ऐसे में अमेरिकी विदेश विभाग से पाकिस्तानी विदेश मंत्री की बातचीत और हाल ही में 20 बिलियन डॉलर की मदद देने वाले साऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के फोन ने इमरान को लो प्रोफाइल रहने का संकेत दिया. इमरान को झुकाने वाली ये पांचवीं बात बेहद कारगर रही जिसके बाद पाकिस्तान ने शांति संदेश देते हुए पकड़े गए विंग कमांडर को तुरंत छोड़ने का ऐलान कर दिया.