चीता और चेतक हेलीकॉप्टर्स की खत्म हो रही लाइफ! वायुसेना ने सरकार को किया आगाह

मेक इन इंडिया (Make in India) के तहत लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर्स के निर्माण में तेज़ी लाने की गुज़ारिश की गई है. इसके साथ ही ये भी कहा गया है कि जो हेलीकॉप्टर्स HAL बना रही है, उनकी डिलीवरी तय समय पर हो जाए.

भारतीय सेनाओं में चीता और चेतक जैसे हेलीकॉप्टर्स की किल्लत

पाकिस्तान और चीन से तनाव के बीच भारत की सशस्त्र बलों ने एक बार फिर चीता और चेतक जैसे हैलीकॉप्टर्स की भारी कमी की ओर इशारा किया है. एयरफोर्स की तरफ से कहा गया है कि इन हेलीकॉप्टर्स में से ज़्यादातर की लाइफ 2023 से खत्म होनी शुरू हो जाएगी.

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक एयरफोर्स की तरफ से मेक इन इंडिया के तहत लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर्स के निर्माण में तेज़ी लाने की गुज़ारिश की गई है. इसके साथ ही ये भी कहा गया है कि जो हेलीकॉप्टर्स हिन्दुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड बना रही है, उनकी डिलीवरी तय समय पर हो जाए. वायुसेना की तरफ से कहा गया है कि एचएएल के ज़रिए ज़रूरी संख्या में हेलीकॉप्टर्स का निर्माण किया जाए. रिपोर्ट में एयरफोर्स के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय को इस बारे में जानकारी दी गई है कि पुराने हो चुके सिंगल इंजन वाले चीता और चेतक हेलीकॉप्टर्स अपने आखिरी पड़ाव में हैं. ऐसे में इनकी भारी कमी परेशान कर सकती है.

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15 साल से की जा रही है मांग

सुरक्षाबलों की तरफ से पिछले 15 सालों से लाइट यूनिटिलिटी हेलीकॉप्टर्स को लेकर चिंताएं जताई गई हैं और लग़ातार इनकी मांग की जा रही है. नंबर्स की बात करें तो फिलहाल तीनों सेनाओं के पास 187 चेतक हेलीकॉप्टर्स और 205 चीता हेलीकॉप्टर मौजूद हैं. इनमें से ज़्यादातर ऐसे हैं जो बहुत पुराने हो चुके हैं. जिसकी वज़ह से इनके क्रैश होने का खतरा भी बढ़ा है, इसके साथ ही इनकी सर्विसिंग को लेकर भी लग़ातार समस्या सामने आ रही है.

483 और हेलीकॉप्टर्स की दरकार

फिलहाल सेनाओं को क़रीब 483 हल्के हेलीकॉप्टर्स और चाहिए. हालांकि 2015 में भारत और रूस की सरकार ने इसके लिए एक करार किए था, जिसमें दो इंजनों के 200 Kamov-226T बनाए जाने थे. इनमें से 135 आर्मी जबकि 65 वायुसेना में शामिल होने हैं. 20 हज़ार करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का स्तर 5 साल बाद तकनीकी आकलन पर है.

एचएएल के प्रमुख ने कहा कि हिन्दुस्तान एयरोनोटिकल लिमिटेड जिन लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर्स का निर्माण कर रहा है जिसमें से 111 आर्मी और 61 भारतीय वायुसेना में शामिल होंगे. इसके लिए एयरफोर्स से इनीशियल ऑपरेशन क्लीयरेंस इसी साल फरवरी में मिला है. आर्मी क्लीयरेंस भी मिलने की कगार पर है. हालांकि रूस और एचएएल दोनों ही प्रोजेक्ट्स में तेज़ी की दरकार है.

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इसके अलावा तीसरा प्रोजेक्ट स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप पर आधारित है जिसमें 111 आर्म्ड, ट्विन इंजन यूटीलिटी चॉपर बनाए जाने हैं. इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 21,000 करोड़ रुपए है. विदेशी निर्माताओं की मदद से भारतीय निजी सेक्टर की कंपनियां इनका निर्माण करेंगी.

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