दिल्ली दंगे: 26 पूर्व डीजीपी ने दिया रिबेरो की चिट्ठी का जवाब, पुलिस की कार्रवाई का किया समर्थन

26 सेवानिवृत्त आईपीएस (IPS) अधिकारियों ने कहा कि वे कुछ साथी पूर्व पुलिस कर्मियों के "आचरण पर आश्चर्यचकित हैं" जो "भारत विरोधी अभिव्यक्ति और सांप्रदायिकता का समर्थन करते हैं.

मुंबई पुलिस (Mumbai Police) के पूर्व कमिश्नर जूलियो रिबेरो सहित दस पूर्व आईपीएस अधिकारियों ने दिल्ली दंगों के मामलों में दिल्ली पुलिस की जांच पर सवाल उठाए जाने के बाद अन्य पूर्व आईपीएस अधिकारियों का समूह राजधानी की पुलिस के समर्थन में आया है. दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया गया था कि वे सत्ताधारी दल से जुड़े अन्य लोगों के प्रति उदासीन रहते हुए सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों को फंसा रहे हैं.

शुक्रवार को जारी एक बयान में, 26 सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारियों ने कहा कि वे कुछ साथी पूर्व पुलिस कर्मियों के “आचरण पर आश्चर्यचकित हैं” जो “भारत विरोधी अभिव्यक्ति और सांप्रदायिकता का समर्थन करते हैं. उन्होंने कथित तौर पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और अन्य गंभीर आरोपों के तहत गिरफ्तार किए गए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व छात्र उमर खालिद द्वारा कथित रूप से उठाए गए कुछ विवादास्पद नारों का उल्लेख किया.

खालिद की गिरफ्तारी पर दिल्ली पुलिस की हुई आलोचना

दंगा मामले में पिछले रविवार को खालिद की गिरफ्तारी की कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आलोचना की थी, जिन्होंने दिल्ली पुलिस पर सरकार विरोधी आवाज़ों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है. 26 पूर्व पुलिस अधिकारियों ने कहा, “दिल्ली पुलिस के पास मामले से जुड़े ऐसे किसी भी व्यक्ति की भूमिका की जांच करने का हर अधिकार और कर्तव्य है, वो कस्टोडियल जांच कानून की उचित प्रक्रिया का एक हिस्सा है. अभियुक्त के पास अग्रिम जमानत या नियमित जमानत लेने के लिए कानून के तहत अपने अधिकार हैं. उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार है, जहां वह खुद को निर्दोष साबित कर सकता है.

 

इन पूर्व धिकारियों ने दिया है जवाब

दिल्ली पुलिस के पूर्व कमिश्नर आरएस गुप्ता, यूपी के पूर्व डीजीपी आरएन सिंह और भानु प्रताप सिंह, बिहार के पूर्व डीजीपी एसके भारद्वाज और रमेश चंद्र सिन्हा, महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी प्रवीण दीक्षित, त्रिपुरा के पूर्व डीजीपी बीएल वोहरा और केरल के पूर्व डीजीपी एस गोपीनाथ इस समूह में शामिल हैं. 26 पूर्व आईपीएस अधिकारियों ने बयान पर हस्ताक्षर किए हैं. बयान में कहा गया है कि पूर्व पुलिस अधिकारियों का एक वर्ग खुद को न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों के कार्यालय के लिए किसी को निर्दोष घोषित करने और पुलिस बल के काम को ख़राब साबित करने की कोशिश नहीं कर सकता.

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इन्हें ऐसे सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं

इन अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा में अपने उत्तराधिकारियों की निष्ठा और व्यावसायिकता पर संदेह करने या सवाल करने का कोई अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियों से पुलिस अधिकारियों को हटाया जा सकता है या फिर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई का दृढ़ संकल्प कमज़ोर हो सकता है. इन अपराधियों में वो लोग भी शामिल हैं, जो दंगे भड़काकर सांप्रदायिक विभाजन की कोशिश करते हैं. बयान में कहा गया है कि हम पूर्व पुलिस अधिकारियों के किसी भी प्रेरित समूह द्वारा किसी भी बयान या इशारों को अस्वीकार करते हैं, जिसका उद्देश्य पुलिस बल और उसके सेवारत अधिकारियों को बदनाम करना है.

जान जोखिम में डालकर पुलिसकर्मी निभा रहे ड्यूटी

पुलिसकर्मी जो आम जनता की सुरक्षा के लिए व्यक्तिगत जोखिम पर दिन-रात अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं. पिछले सप्ताह, विख्यात पूर्व आईपीएस अधिकारी रिबेरो ने दिल्ली पुलिस प्रमुख एसएन श्रीवास्तव को एक पत्र लिखा था, जिसमें उनसे उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की जांच करने और यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया था कि यह निष्पक्ष हो. रिबेरो ने दिल्ली पुलिस प्रमुख से कहा कि पुलिस उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रही है जिन्होंने दंगों के लिए नफरत फैलाने वाले भाषण दिए

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