अरुण जेटली को याद कर भावुक हुए PM मोदी, बोले- जिंदगी भर रहेगा इस बात का मलाल…

मेरे लिये अपने दोस्त को आदर पूर्वक अंजली देना मेरा दुर्भाग्य है. यह किसी के जीवन में नहीं आना चाहिए: PM मोदी
PM Modi, अरुण जेटली को याद कर भावुक हुए PM मोदी, बोले- जिंदगी भर रहेगा इस बात का मलाल…

भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली की याद में मंगलवार को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया. श्रद्धांजलि सभा में PM मोदी ने भावुक होते हुए कहा, ‘आज मेरे नसीब में एक अच्छे पुराने और उम्र में छोटे दोस्त को श्रद्धांजलि देने की नौबत आई ये मेरा दुर्भाग्य है. इतने लंबे समय तक मित्र का अंतिम दर्शन नहीं कर पाया इसका हमेशा मलाल रहेगा.’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘पिछले दिनों जो उनके लिए लिखा गया और कहा गया उससे हम अनुभव कर सकते हैं कि उनका व्यक्तित्व कितना विशाल था. पल भर के लिए कल्पना कीजिए कि मेरे जैसे व्यक्ति पर क्या बीतती होगी, कितनी बड़ी कमी हुई शब्दों में बयान नहीं कर सकते. छोटी आयु में डायबिटीज से जूझते रहे लेकिन आखरी समय तक वो न अपनी बात करते थे बल्कि देश के बारे में ही बात करते थे.’

‘वो देश में रम गए थे शायद यही उनकी ऊर्जा थी. कैबिनेट में मैं हमेशा उनकी कमी महसूस करता था. उनके पास हिंदुस्तान के शासन व्यवस्था की इनसाक्लोपीडिया था कोई भी विषय आता तो वो उसके पूर्व के बारे में जानकारी देते थे. वो मीडिया वालों के काफ़ी प्रिय और मददगार हुआ करते थे. वो कभी भी पार्टी व्यवस्था के बाहर नहीं रहे. हम कई बार एक ही कमरे में वर्किंग कमेटी के दौरान रहे.’

‘अटल जी के समय भी ड्राफ्टिंग का काम आडवाणी के और अरुण जी ही किया करते थे. वे सिर्फ और सिर्फ देश के लिए काम आए और इसी सपने के साथ जीते रहे. वे छात्र राजनीति में एक पौधा थे और अपने प्रतिभा से भारत की राजनीति में एक वट वृक्ष बन गए. हम सब ने कुछ न कुछ खोया है. मेरे लिये अपने दोस्त को आदर पूर्वक अंजली देना मेरा दुर्भाग्य है. यह किसी के जीवन में नहीं आना चाहिए.’

‘मैं अंतिम दर्शन उनके नहीं कर पाया. यह मेरे मन में एक बड़ा बोझ है. वो बीमार थे और उनकी बिमारी कोई आज की नहीं थी. वो जब भी बात करते थे तो देश में क्या चल रहा है, आगे क्या होगा. हम लोगों को कैसे करना चाहिए. वो कभी अपनी बीमारी का जिक्र नहीं करते थे.’

‘पहली बार जब कोई क्लाइंट उनके पास जाता था तो वो निराश होता था. वो कहता कि उन्होंने मेरी बात सुनी ही नहीं. जब मैं उनको अपनी बात बता रहा था तो तब वो टीवी देखते रहते थे लेकिन जब वो कोर्ट जाते थे तो वो विजय ही पाते थे. अरुण जेटली एक अनमोल रत्न थे. उनके पास अपार जानकारियां थी. वो वन लाइनर के लिए जाने जाते थे.’

‘अरुण जी कभी भी पार्टी व्यवस्था से बाहर नहीं रहे. हम लोग कई मर्तबा एक कमरे में साथ रहे. उन्हें सुविधाओं की लालसा नहीं थी. आप कल्पना कर सकते हैं की वो छात्र राजनीति की नर्सरी में पैदा हुआ पौधा था और हिन्दुस्तान की राजनीति में खुद के प्रयास से वटवृक्ष बन गए थे.’

PM Modi, अरुण जेटली को याद कर भावुक हुए PM मोदी, बोले- जिंदगी भर रहेगा इस बात का मलाल…

इस मौके पर वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा, दिनेश त्रिवेदी, शरद पवार, अभिषेक मनु सिंघवी, सतीश मिश्रा और दूसरे बड़े नेता मौजूद  रहे. सभी ने जेटली जी को याद करते ये बातें कहीं…

PM Modi, अरुण जेटली को याद कर भावुक हुए PM मोदी, बोले- जिंदगी भर रहेगा इस बात का मलाल…

अमित शाह : अरुण जी के जाने से देश संसद राजनीति और व्यक्तिगत तौर पर जो कमी हुई है उसे भरा नहीं जा सकता. वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे. न्यायपालिका, खेल-खेल में सुचिता बनाने में उनका काफी योगदान है. राजनीति में अपने बारे में सोचे बिना काम किया. उनमें दोस्त बनाने की कला थी. मेरे जीवन मे जब भी कठिन समय आया वो मेरे साथ थे. जब मैं दिल्ली आया तो कभी नहीं लगा कि मैं अपना प्रदेश छोड़ के आया और वो हमेशा मेरे साथ रहे. अरुण जी ने जीएसटी को लागू करवाया. धारा 370 जब समाप्त की गई तो अरुण जी से मेरी बात हुई तो उनके आवाज से नहीं लगा कि वे बीमार है उनके आवाज में हमेशा आघात रहा. यह उनके परिवार के साथ साथ पार्टी के लिए भी बड़ा आघात है.

सुखबीर सिंह बादल, अकाली दल : कुछ लोग जो दूसरों का दुख दर्द दूर करते हैं उन्हें दुनिया याद करती है. संसद में सभी दलों के नेताओं से बात करते थे. हर कोई उन्हें मिस करेगा. उन्हें पंजाब से काफी लगाव था. मेरे पिताजी से काफी लगाव था. उनकी सलाह के बिना कोई फैसला नहीं होता था.

शरद पवार, एनसीपी : देश के लिए राज्य सभा हो या लोकसभा सभी जगह काम करने का मौका मिला. क्रिकेट में हमने साथ काम किया. जब भी कोई परेशानी हो उनके पास हल होता था. राजनीति विचारधारा अलग थी पर व्यक्तिगत रिश्ते हमेशा अच्छे थे. मैं उनसे नाराज हूं. उन्हें मुझसे पहले दुनिया से जाने का अधिकार नहीं था.

अभिषेक मनु सिंघवी, कांग्रेस : लगभग 35 वर्ष के साथ हमने काम किया उसके बारे में इतनी स्मृति है कि समय कम है. अरूण से पहली मुलाकात इंडियन एक्सप्रेस केस के दौरान हुई. 2006 से लेकर 2013 तक संसद में डिबेट में हम आमने सामने रहे. अरूण जेटली जी का राजनीति में 15 साल  देर से आए. हर पार्टी में गुटबाजी होती है. बड़े दिल के व्यक्ति थे. उन्हें खाने का इतना शौक था कि चार घंटे की यात्रा कर विदेश में एक सिक्ख परिवार के यहां खाना खाने पहुंचे.

PM Modi, अरुण जेटली को याद कर भावुक हुए PM मोदी, बोले- जिंदगी भर रहेगा इस बात का मलाल…

दिनेश त्रिवेदी, टीएमसी : बुरे से बुरे सपने में भी उनको श्रद्धांजलि कोई सोच नहीं सकता. एक बढ़िया स्पोर्ट्स मैन की तरह जिंदगी जी. हमेशा लोगों को जोड़ने में लगे रहते थे.

सतीश चंद्र मिश्रा : 1981 से हम एक दूसरे को जानते थे. वे प्रखर वक्त और अधिवक्ता ही नहीं सही मायने में इंसान थे. मेरे बेटे की शादी में बिना किसी प्रोटोकॉल के आये. वे एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्हें हम खो देंगे ऐसा सोचा भी नहीं था. 1952 में ही हम दोनों पैदा हुए. 6 तारीख को ही हमारी आखरी बात हुई और हमें 370 में स्टैंड लेने पर बधाई दी.

त्रिची शिवा, पीएमके : भारतीय जनता पार्टी मे हाल के दिनों में एक दूसरा बड़ा नेता खोया है. उनसे काफी कुछ सीखा जा सकता है. ट्रासजेंडर इश्यू को लेकर मैंने जब संसद में प्राइवेट बिल पेश किया तब उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सबको साथ होना चाहिए.

पिनाकी मिश्रा, बीजेडी : 1982 में पहली बार मिला था. हर बैठक में अरूण जेटली जी के पास एक विजन हुआ करता था. एक बढ़िया वकील, वक्ता और बेहतरीन इंसान…

राजीव रंजन, जेडीयू : अरूण जेटली जी के बारे में जो कुछ भी कहा जाए वह कम है. वह मानव नहीं महामानव थे. लोदी गार्डन में प्रतिदिन टहला करते थे. अरूण जेटली जी के याद में कोई भी शब्द कहा जाए वो कम है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा किया कि उनकी मूर्ति लगाई जाएगी.

नवनीत कृष्णण, एआईएडीएमके : उनमें एक लीडरशिप क्वालिटी थी. राज्य सभा में बहुत मिस करेंगे.

कुलभूषण जी, प्रांत संचालक विश्व हिन्दू परिषद : अरूण जेटली जी ने मन का भेद नहीं बल्कि विचारों के भेद बताई.

शरद पवार, एनसीपी : देश के लिए राज्य सभा हो या लोकसभा सभी जगह काम करने का मौका मिला. क्रिकेट में हमने साथ काम किया. जब भी कोई परेशानी हो उनके पास हल होता था. राजनीति विचारधारा अलग थी पर व्यक्तिगत रिश्ते हमेशा अच्छे थे. मैं उनसे नाराज हूँ. उन्हें मुझसे पहले दुनिया से जाने का अधिकार नहीं था.

PM Modi, अरुण जेटली को याद कर भावुक हुए PM मोदी, बोले- जिंदगी भर रहेगा इस बात का मलाल…

सुखबीर सिंह बादल, अकाली दल : कुछ लोग जो लोगों का दुख दर्द दूर करते हैं उन्हें दुनिया याद करती है. संसद में सभी दलों के नेताओं से बात करते थे. हर किसी उन्हें मिस करेगा. उन्हें पंजाब से काफी लगाव था. मेरे पिताजी से काफी लगाव था. उनकी सलाह के बिना कोई फैसला नहीं होता था.

जेपी नड्डा, भाजपा : देश में असमय उच्चतम कोटि का नेता खो दिया है. विरोध के बावजूद सबसे सामंजस्य बनाना उनकी विशेष कला थी. विपक्ष के लोग भी उनकी विद्वता को लोहा मानते थे. विनोदी स्वभाव था. पार्टी को जो नुकसान हुआ है उसे बयां नही किया जा सकता है. देश के लिए इमरजेंसी में जेल गए. १९७७ में जनता पार्टी के एक्जीक्यूटिव पार्टी का सदस्य बनाया गया. जटिल से जटिल पार्टी की समस्या के पांच मिनट में सुलझा लेते थे.

रामविलास पासवान, एलजेपी : नौजवानों के बीच काफी प्रिय थे. संसद के बाहर भीतर सभी जगह मार्गदर्शक का काम करते थे. नीरस को भी सरस बनाना उनका सबसे बड़ा गुण था. उन्हें छोले भटूरे काफी प्रिय था. डर के मारे प्रधानमंत्री के सामने जो बात नहीं कह पाते थे वह उनसे कह देते थे.

रामगोपाल यादव, सपा : मैं अरूण जेटली जी को राज्य सभा में हमेशा मिलनसार रूप में देखा. हमारे बहुत निकट संबंध थे. भावुक हुए रामगोपाल यादव, जब जब राज्य सभा में उनकी कुर्सी की ओर देखूँ बहुत याद आएंगे.

डी राजा : अरूण जेटली जी हमेशा मुद्दों पर चर्चा करते थे. लोगों की मदद करते थे. उनका सेंस ऑफ ह्यूमर गजब का था. वह बहुत अच्छे दोस्त थे.

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