“2014 में RBI ने नहीं उठाए सही कदम”, NPA पर उर्जित पटेल ने सुनाई खरी-खरी

उर्जित पटेल ने कहा कि आसान उपाय तलाशने या समस्याओं का छिपाने से काम नहीं चलेगा. इससे पूंजी को खोलने में विलंब ही होगा.

नई दिल्ली: आरबीआई के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा है कि 2014 तक बैंकों और सरकार के कारण वर्तमान समय में कर्ज में गड़बड़ी और पूंजी आधार में कमी आई है. उनका कहना है कि पिछले कुछ समय में बैंकों ने बहुत ज्यादा कर्जा दिया. इस दौरान सरकार ने अपना काम ठीक से नहीं निभाया.

बढ़ते NPA को लेकर किया आगाह
पटेल ने समुचित विनियमन के बिना कर्ज के जरिए विकास में तेजी लाने का काम सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सौंपे जाने के प्रति आगाह किया है, क्योंकि इससे दोबारा गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) बढ़ने की संभावना है. मालूम हो कि सरकार के साथ मतभेदों के बाद उन्होंने पिछले साल रिजर्व बैंक के गर्वनर के पद से इस्तीफा दे दिया था.

स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी के 19वें सालाना सम्मेलन में भारत की आर्थिक नीति पर पटेल की प्रस्तुति के अनुसार, अतीत को दोहराने की लालच को छोड़ देना चाहिए. उन्होंने कहा, “आसान उपाय तलाशने या समस्याओं का छिपाने से काम नहीं चलेगा. इससे पूंजी को खोलने में विलंब ही होगा और पर्याप्त भावी निवेश की राह में अड़चन आएगी.”

‘कर्ज देने का डाला जा रहा दबाव’
पटेल ने कहा कि सरकारी बैंकों पर दबाव डालकर विकास के चक्र को तेज करके मुख्य अर्थव्यवस्था बढ़ावा देने में दुष्कचक्र के पराकाष्ठा पर पहुंचने की क्षमता होती है. उच्च राजकोषीय घाटे को संभालने के लिए सरकार के उपाय कमजोर हो चुके हैं और सरकारी बैंकों पर अर्थव्यवस्था या पसंदीदा सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कर्ज देने का दबाव डाला जा रहा है.

पटेल ने पांच साल से ज्यादा का वक्त रिजर्व बैंक में बिताया. इस दौरान वे डिप्टी गर्वनर भी रहे. उन्होंने कहा, “इससे एनपीए बढ़ेगा जिसके लिए सरकार की ओर से इक्विटी डालने की आवश्यकता है और इससे आखिरकार राजकोषीय घाटा बढ़ेगा और कालक्रम में सरकार का दायित्व बढ़ेगा.”

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