गोवा के राज्‍यपाल बने सत्‍यपाल मलिक, बोले- अब आराम से समय बिताऊंगा

सत्‍यपाल मलिक मेरठ कॉलेज में दो बार छात्र संघ के अध्यक्ष रहे हैं. इसके बाद बीकेडी के टिकट पर बागपत से साल 1974 में चुनाव लड़ा और चरण सिंह के भारतीय क्रांति दल के टिकट पर जनता ने उन्हें विधायक के रूप में चुना.
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पणजी: जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने रविवार को गोवा के राज्यपाल के रूप में शपथ लेली. बॉम्‍बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नदंराजोग ने पणजी के नजदीक यहां राजभवन में उन्हें शपथ दिलाई.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 25 अक्टूबर को मलिक को गोवा का राज्यपाल नियुक्त किया था. उन्होंने मृदुला सिन्हा का स्थान लिया है. सिन्हा का कार्यकाल 31 अगस्त को समाप्त हो गया था.

अनुच्छेद 370 को रद्द किए जाने के साथ जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लिए जाने के बाद उसका विभाजन कर दो केंद्रीय शासित प्रदेश (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) बनाने के वक्त तक सत्‍यपाल मलिक प्रदेश के राज्यपाल रहे.

सत्‍यपाल मलिक ने शपथ ग्रहण के बाद कहा कि उन्होंने जम्मू- कश्मीर के राज्यपाल के तौर पर कार्यकाल के दौरान उन्‍हें काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा. उन्‍होंने जम्‍मू कश्‍मीर को समस्याओं वाली जगह बताया.

मलिक ने कहा, “मैं कश्मीर से आया हूं, जिसे एक बहुत ही समस्या वाले स्थान के रूप में जाना जाता है. मैंने वहां सभी मुद्दों को सफलतापूर्वक संभाला. अब एक शांतिपूर्ण और अच्छा स्थान है, जो प्रगति कर रहा है. यहां का नेतृत्व विवादास्पद नहीं है। वे बहुत अच्छे तरह से काम कर रहे हैं.”

गोवा के राज्यपाल के रूप में नई जिम्मेदारी के बारे में मलिक ने यह भी कहा कि वह एक अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण और आराममय कार्यकाल को लेकर उत्सुक हैं. उन्‍होंने कहा, “इसलिए मैं महसूस करता हूं कि मैं यहां काफी शांतिपूर्ण और आराम का समय बिताऊंगा.”

सत्‍यपाल मलिक का सफरनामा 

सत्‍यपाल मलिक स्वतंत्रता सेनानी दिवंगत राम मनोहर लोहिया की समाजवादी विचारधारा से प्रेरित होकर 1965 में राजनीति में आए थे. लोक दल की तरफ से 1980 में वह राज्यसभा के लिए पहली बार चुने गए. 1986 में वह कांग्रेस पार्टी की ओर से भी राज्यसभा के लिए चुने गए.

सत्‍यपाल मलिक का जन्‍म उत्‍तर प्रदेश के बागपत स्थित हिसावदा गांव में हुआ. उनके पिता बुध सिंह गरीब किसान थे. बुध सिंह के निधन के बाद सतपाल मलिक का पालन पोषण उनकी माता जगबीरी देवी ने किया. उन्होंने मेरठ कॉलेज से बीएससी और लॉ किया. राम मनोहर लोहिया से प्रेरणा लेकर उन्होंने पहली बार 1968 में छात्र संघ चुनाव लड़ा और वह मेरठ कॉलेज के पहले अध्यक्ष चुने गए थे.

सत्‍यपाल मलिक मेरठ कॉलेज में दो बार छात्र संघ के अध्यक्ष रहे हैं. इसके बाद बीकेडी के टिकट पर बागपत से साल 1974 में चुनाव लड़ा और चरण सिंह के भारतीय क्रांति दल से जनता ने उन्हें विधायक के रूप में चुना. इस दौरान समाजवादी नेता के तौर पर सत्यपाल मलिक ने किसानों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया.

बाद में सत्‍यपाल मलिक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए और 2005 में लोकसभा के लिए भी चुने गए.

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