हैदराबाद एनकाउंटर की होगी ज्यूडिशियल इंक्वायरी, 6 महीने में आएगी रिपोर्ट

कमीशन 6 महीने के अंदर पूरी जांच करेगा. इस दौरान किसी अन्य अदालत के आदेश मान्य नहीं होंगे. जो जांच राज्य सरकार कर रही है, उस पर SC ने रोक लगा दी है.
Hyderabad encounter investigate, हैदराबाद एनकाउंटर की होगी ज्यूडिशियल इंक्वायरी, 6 महीने में आएगी रिपोर्ट

हैदराबाद एनकाउंटर (Hyderabad Encounter) मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई हुई. इस दौरान सीजेआई (Chief Justice of India) शरद अरविंद बोबडे ने कहा कि हम चाहते हैं मामले की निष्पक्ष तरीके से जांच की जाए. एनकाउंटर पर पुलिस ने जो दावा किया है उसकी जांच करना जरूरी है.

इसलिए CJI ने गुरुवार को तीन सदस्यीय जांच कमीशन गठित किया. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के पूर्व जज एस सिरपुरकर की अगुवाई में मुठभेड़ की जांच की जाएगी, इसके अलावा बॉम्बे HC के रिटायर्ड न्यायाधीश रेखा बलदोता और पूर्व सीबीआई निदेशक कार्तिकेयन इसमें शामिल होंगे.

बता दें कि कमीशन 6 महीने के अंदर जांच पूरी करेगा. इस दौरान किसी अन्य अदालत के आदेश मान्य नहीं होंगे. जो जांच राज्य सरकार कर रही है, उस पर SC ने रोक लगा दी है.

SC में आज हुई सुनवाई के दौरान किसने क्या कहा, पढ़ें-

याचिकाकर्ता के मुताबिक पुलिस कि स्टोरी झूठी है और ऐसे में स्वतंत्र जांच जरूरी है. हम राज्य द्वारा गठित एसआईटी को पूरी तरह से भरोसा नहीं कर सकते. ऐसे में सच्चाई को सामने लाने के लिए यह जरूरी है. राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन इस जांच में पूरा सहयोग देंगे.

वकील जीएस मनी ने कहा कि यह एनकाउंटर पूरी तरह से संदिग्ध है.

सीजेआई ने पूछा आपका क्या लेना देना है इससे?

जीएस मनी ने कहा यह मानवाधिकार से जुड़ा मामला है.

सीजेआई ने पूर्व अटार्नी जनरल मुकुल से कहा मामले के पूरे फैक्ट बताइए.

तेलंगाना सरकार की ओर से वकील मुकुल रोहतगी ने कहा पीड़ित लड़की वेटनरी डॉक्टर थी और शुरू से पूरी जानकारी देना शुरू किया. चारों आरोपी सीसीटीवी फुटेज से पहचाने गए थे.

मुकुल ने कहा लोग बहुत नाराज थे और थाने के बाहर 40-50 हजार लोग खड़े थे. इन आरोपियों को इसी वजह से देर रात घटना के रिट्रायल के लिए भेजा गया.

मुकुल: आरोपियों ने घटनास्थल पर पुलिस टीम पर अटैक किया, फायर किया और भागे जिसके बाद पुलिस ने उन पर जवाबी कार्यवाही की. इस दौरान एसीपी और अन्य कनिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद थे.

मुकुल: जवाबी कार्यवाही में वह मारे गए. चार में से दो ने पहले पुलिस टीम पर हमला किया.

मुकुल: पुलिस टीम उन्हें भागने नहीं दे सकती थी. यह मामला इतना गंभीर हो चुका था. ऐसे में जवाबी कार्रवाई में आरोपी मारे गए.

मुकुल: आरोपियों कि पहचान में कोई संशय नहीं है, क्योकि टोल प्लाजा पर उनकी पहचान सीसीटीवी से हो चुकी थी.

सीजेआई ने कहा कि इस मामले कि न्यायिक जांच होनी चाहिए

मुकुल: आरोपियों कि पहचान में कोई शक-सुबा नहीं है.

मुकुल: मजिस्टेरियल जांच के लिए रिक्वेस्ट की गई है.

मुकुल: एनएचआरसी ने भी पड़ताल की है.

मुकुल: हमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच कराने में कोई आपत्ति नहीं है.

सीजेआई ने कहा कि आप जांच करा रहे हैं सवाल इस पर नहीं, सवाल ये है कि परिणाम क्या आएंगे जांच के.

मुकुल: पीयूसीएल फैसले कहा हवाला देते हुए कहा कि राज्य द्वारा गठित एसआईटी का नेतृत्व पूर्व जज द्वारा नहीं किया जा सकता.

सीजेआई: भले ही आप पुलिस टीम पर अभियोग चलाएं. लेकिन क्या निष्कर्ष बाद में आएंगे मसला इसका है.

सीजेआई: आपके पुलिस टीम पर ट्रायल चलाएंगे. लेकिन आपके पास इस मामले में कोई साक्ष्य नहीं है. ऐसे में अभियोग में कुछ नहीं आएगा. इसलिए स्वतंत्र जांच होनी चाहिए.

मुकुल: परिस्थितिजन्य साक्ष्य हैं जो इस मामले में पुलिस टीम पर अभियोग चलाने में काम आएंगे.

सीजेआई: इसमें आरोपी वही है जो जांच कर्ता है. ऐसे में अभियोग चलाकर मजाक बनेगा.

सीजेआई: हम ये नहीं कह रहे कि आप कुछ गलत कर रहे हैं या करेंगे. आप बस हमारे द्वारा बनायी जाने वाले विशेष जांच दल (एसआईटी) का सहयोग करें.

मुकुल: मुझे एक दलील और देने दीजिए

याचिकाकर्ता के वकील एमएल शर्मा ने कहा कि पुलिस टीम के एनकाउंटर में तमाम लूप होल हैं.

एक अन्य वकील ने कहा कि इस एनकाउंटर को जिस तरह से गौरवगाथा बनाया गया. वो दुर्भाग्यपूर्ण है.

सीजेआई: हम हकीकत को सामने लाने के लिए ज्यूडीशियल इंक्वायरी पूर्व सुप्रीम कोर्ट के जज के नेतृत्व में कराएंगे.

सीजेआई: इस मामले के साक्ष्य मीडिया की पहुंच तक कैसे आए.

सीजेआई: ज्यूडीशियल इंक्वायरी से सबकुछ सामने आ जाएगा. यह राज्य सरकार के लिए भी अच्छा रहेगा.

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