गोडसे के मंदिर से पैगंबर के खिलाफ बयान तक… जानें कब-कब सुर्खियों में रहे कमलेश तिवारी

कमलेश एक हिंदू संगठन के नेता थे, लेकिन वह ज्यादा चर्चित नेता नहीं थे, बावजूद इसके वह सुर्खियों में बने रहते थे. आइए जानते हैं कमलेश तिवारी के 6 ऐसे कदम जिससे चलते वह सुर्खियों में रहे.

लखनऊ के नाका चौक पर शुक्रवार को कमलेश तिवारी की चाकू घोपकर हत्या कर दी गई, जिसके बाद से वह सुर्खियों में बने हुए हैं. कमलेश एक हिंदू संगठन के नेता थे, लेकिन वह ज्यादा चर्चित नेता नहीं थे, बावजूद इसके वह सुर्खियों में बने रहते थे. आइए जानते हैं कमलेश तिवारी के 6 ऐसे कदम जिससे चलते वह सुर्खियों में रहे.

पैगंबर के खिलाफ बयान देकर भड़का दी थी हिंसा

साल 2015 में कमलेश उस वक्त चर्चा में आए, जब उन्होंने पैगंबर मोहम्मद पर अत्यधिक विवादास्पद टिप्पणी की थी. इस पर काफी विवाद हुआ और पूरे देश में इसको लेकर मुस्लिमों ने प्रदर्शन किया था. तिवारी की टिप्पणी के बाद सहारनपुर और देवबंद विशेष रूप से उबाल पर थे, जिसके बाद सड़कों पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला.

राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद कर दिया गया और पुलिस को आक्रोश को नियंत्रित करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. यहां तक कि पुलिस और भीड़ के बीच हुई झड़प में एक पुलिस अधिकारी घायल हुआ और आक्रोश तिवारी की गिरफ्तारी के बाद ही शांत हो सका.

भावना भड़काने के लिए लगा था NSA

भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए (धर्म के आधार पर समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 295-ए (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्यों के उद्देश्य से किसी भी वर्ग की धार्मिक भावनाओं व धार्मिक मान्यताओं का अपमान करना) के तहत उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई थी.

उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया गया और उन्हें एक साल तक जेल में रहना पड़ा. 2016 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उनके खिलाफ एनएसए रद्द कर दिया था. बाद में उन्हें जमानत पर छोड़ दिया गया.

हिंदू महासभा ने किया था तिवारी का विरोध

कमलेश तिवारी अखिल भारतीय हिंदू महासभा के स्वयंभू अध्यक्ष थे और उनके इस दावे का खुद कई बार महासभा ने ही विरोध किया था. हालांकि फिर भी वह खुद को हिंदू महासभा का अध्यक्ष करार देते थे.

2017 में बनाई हिंदू समाज पार्टी

हिंदू महासभा से जुड़े रहने के बाद आखिरकार 2017 में कमलेश तिवारी ने हिंदू समाज पार्टी बनाई और हिंदू कट्टरपंथी के रूप में उभरने के लिए कई प्रयास किए.

नाथूराम गोडसे का मंदिर बनाने का भी किया ऐलान

हिंदू कट्टरपंथी के रूप में उभरते हुए कमलेश तिवारी ने सीतापुर में अपनी पैतृक जमीन पर महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का मंदिर बनाने का ऐलान किया था. लेकिन बापू के हत्यारे का मंदिर निर्माण कभी शुरू ही नहीं हो सका.

चुनावी पारी खेलने की भी कोशिश, लेकिन विफल

विवादित बयानबाजी और कट्टर हिंदुत्व की राह पर चलते हुए कमलेश तिवारी ने साल 2012 में चुनावी राजनीति में उतरने का प्रयास किया. हालांकि उनके हाथ असफल ही आई. वह लखनऊ से विधानसभा चुनाव लड़े और हार गए थे.

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