वनस्पति तेल से दिग्गज आईटी कंपनी बनी WIPRO की कमान जिन रिशद को सौंपेंगे अज़ीम प्रेमजी, वो कौन हैं?

विप्रो को 53 सालों तक संभालनेवाले अज़ीम प्रेमजी अब रिशद को कंपनी की कमान सौंप रहे हैं. जानि रिशद के बारे में वो जो अब तक हम नहीं जानते थे.

विश्वप्रतिष्ठित विप्रो में नेतृत्व परिवर्तन हो रहा है. 53 साल तक अज़ीम प्रेमजी इसकी पहचान रहे. उनकी सुलझी लीडरशिप और दरियादिली हमेशा सुर्खियां बनाती रही, मगर अब 30 जुलाई 2019 से ये दिग्गज आईटी कंपनी अज़ीम प्रेमजी के उत्तराधिकारी रिशद प्रेमजी चलाएंगे.

पांच सालों तक वो इस ज़िम्मेदारी संभालेंगे जिसकी शुरूआत 31 जुलाई से होगी. हालांकि अज़ीम प्रेमजी नॉन-एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर और बतौर फाउंडर चेयरमैन कंपनी को मार्गदर्शन देते रहेंगे. विप्रो 1.76 लाख करोड़ की मार्केट कैप रखने के साथ देश की तीसरी बड़ी आईटी कंपनी है. इसके विश्व में 1 लाख 30 हजार कर्मचारी हैं जो दुनिया की 54 देशों में नौकरी करते हैं. बैंगलोर में विप्रो का हेडक्वार्टर है. हर कोई जानना चाहता है कि विप्रो को आसमान तक पहुंचा देनेवाले अज़ीम प्रेमजी की विरासत संभालनेवाले रिशद आखिर कौन हैं और उनकी प्रोफाइल क्या है..

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रिशद विप्रो से आज ही नहीं जुड़े बल्कि वो कंपनी में 2007 से सक्रिय हैं जो एक दशक से भी अधिक बनता है. उन्होंने इन्वेस्टर रिलेशन और कॉरपोरेट अफेयर्स से जुड़े मामलों को करीब से देखा और निपटाया है. विप्रो के चलाए जा रहे सामाजिक और शिक्षा के कामों से भी उनका जुड़ाव रहा है. इससे पहले उनका अनुभव लंदन में काम करने का भी है. वहां उन्होंने जीई कैपिटल समेत कुछ कंपनियों में काम किया.

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वैसे रिशद अज़ीम प्रेमजी के बेटे हैं तो उन्होंने पिता से भी व्यापारिक गुर सीखे हैं. उनकी मां का नाम यास्मीन है और उनके एक भाई तारिक भी हैं.

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तारिक प्रेमजी भी विप्रो के समाजसेवा से जुड़े कामों में जुटे हैं

रिशद की पढ़ाई हावर्ड बिज़नेस स्कूल से हुई है जहां उन्हें एमबीए करने का मौका मिला. अमेरिका के वेस्लेयन यूनिवर्सिटी से उन्होंने अर्थशास्त्र में स्नातक भी किया. लंदन के प्रतिष्ठित लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उन्होंने स्पेशल कोर्स किया. रिशद ने आईटी कंपनियों के बड़े संगठन नैस्कॉम की चेयरमैनशिप भी संभाली है. उन्हें 2014 के वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में यंग ग्लोबल लीडर का सम्मान मिला.