मंत्री से महामंडलेश्वर बनने वाली निरंजन ज्योति का ये है पूरा सफर

Share this on WhatsAppनयी दिल्ली  आपको तय करना है कि दिल्ली में सरकार रामजादों की बनेगी या *****जादों की. कुछ ऐसे ही विवादास्पद बयान देकर सदन में सरेआम माफ़ी मांगने वाली केंद्रीय मंत्री निरंजन ज्योति अब महामंडलेश्वर बन गयी हैं. बाकायदा भव्य धार्मिक समारोह आयोजित कर प्रयागराज में इन्हें निरंजनी अखाड़े ने इस पदवी से […]

नयी दिल्ली 

आपको तय करना है कि दिल्ली में सरकार रामजादों की बनेगी या *****जादों की. कुछ ऐसे ही विवादास्पद बयान देकर सदन में सरेआम माफ़ी मांगने वाली केंद्रीय मंत्री निरंजन ज्योति अब महामंडलेश्वर बन गयी हैं. बाकायदा भव्य धार्मिक समारोह आयोजित कर प्रयागराज में इन्हें निरंजनी अखाड़े ने इस पदवी से सुशोभित किया.

उत्तर प्रदेश की फतेहपुर सीट से वर्ष 2014 में ज्योति ने पहला लोकसभा चुनाव जीता था. हिंदू महिलाओं को अपने ही समुदाय में शादी करने की हिदायत देने वाली निरंजन ज्योति 2012में हमीरपुर विधानसभा से भी चुनाव लड़ चुकी हैं.

धर्म के रास्ते चलकर राजनीति में आने वाली साध्वी एक समय में विश्व हिंदू परिषद से भी जुड़ी रहीं. वर्ष 1987 में विश्व हिंदू परिषद का दामन थामने वाली साध्वी ने राम जन्म भूमि आंदोलन में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया. इस दौरान इन्होंने पूरे देश का भ्रमण कर लोगों में राम मंदिर की अलख जगाई. इन्हें एक कथावाचक के तौर पर भी जाना जाता है. 1990 में बीजीपी के साथ कदम से कदम मिलकर चलने वाली निरंजन ने 2002 में पहली बार और 2007 में दूसरी बार हमीरपुर विधान सभा सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा. हालांकि 2012 के ही विधानसभा चुनाव में इन्हें सफलता मिल पायी.

हमीरपुर के पटेवरा गांव में 1967 में इनका जन्म हुआ. मात्र 14 वर्ष की उम्र में ही ब्रह्मलीन पूज्य गुरुदेव स्वामी अच्युतानंद के संपर्क में आयीं और आश्रम जाकर उनसे शिक्षा दीक्षा लेने लगीं. ज्योति निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर परमानंद गिरी की शिष्या भी हैं. विश्लेषकों की माने तो राजनीतिक समीकरणों के मद्देनज़र कैबिनेट में इनकी एंट्री हुई. निरंजनी अखाड़े की सोलहवीं महिला महामंडलेश्वर बनने वाली ज्योति को बतौर गौ सेवक भी जाना जाता है.