गैंगरेप पीड़िता का दर्द हुआ ज़ाहिर- ‘अब जल चुकी हूं तो लोग कम से कम मेरा रेप नहीं करेंगे…’

हापुड़ की गैंगरेप पीड़िता ने अस्पताल के बिस्तर पर कराह कर जो कुछ कहा है वो उसकी व्यथा कथा का सार है. सबसे खतरनाक ये है कि इस दर्द को झेलनेवाली वो अकेली नहीं है.

हाथ की एक उंगली ज़रा सी आंच में झुलस जाए तो सुकून पाने के लाख जतन किए जाते हैं, मगर एक लड़की खुद को आग के हवाले कर दे तो खुद ही समझिए कि उसकी मजबूरी पहाड़ से भी कितनी ऊंची रही होगी…

दिल्ली के अस्पताल में वो अपनी अस्सी फीसदी झुलस चुकी काया के साथ कराह रही है. पूरा शरीर पट्टियों में लिपटा है. कल तक उसकी शिकायत पर जिन्होंने कान नहीं धरे आज वो उसके मुजरिमों की तलाश में जुटे हैं. चमकीले चुनाव में खोये पत्रकार भी हाल जानने को बेचैन हैं. जिसके भी कान में बेबसी की ये कहानी पड़ती है वही तौबा तौबा कर रहा है.

इंसानी बस्तियों के बीच भेड़ियों को शर्मसार करनेवाली कितनी ही घटनाएं हर दिन और हर रात घटती हैं इसकी कोई गिनती नहीं रख सकता, मगर ये कुकृत्य तो हुक्मरानों और हुक्कामों के गढ़ दिल्ली से ज़रा ही दूर हापुड़ में घट रहा था तब भी किसी को भनक क्यों नहीं पड़ी. वो भी तब जब कई-कई बार उसने पुलिसवालों से इंसाफ की गुहार लगाई लेकिन उसकी हर गुहार कान पर रेंगकर गुज़र गई जूं भर निकली.

सोचकर ही दिल दहलता है कि पहले उसने अपने शरीर पर बलात्कार झेले.. अब असहनीय जलन झेल रही है. चारों तरफ मचे कोहराम के बीच वो आहिस्ता से जो कह रही है वो पूरे तंत्र के लिए डूबकर मर जाने के लिए काफी है. उसने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा – काश मैं मर जाती. कोई भी इस तरह के ज़ख्मों को नहीं झेलना चाहता लेकिन अब जबकि मैं जल चुकी हूं तो लोग कम से कम मेरा रेप तो नहीं करेंगे.

बलात्कार से सुरक्षा का ये कैसा भरोसा है जो किसी लड़की को सिर्फ तब मिलता है जब वो खुद को जला ले!

इस सवाल का जवाब समाज और व्यवस्था दोनों को देना चाहिए. 28 अप्रैल 2019 को जब लड़की ने खुद को आग के हवाले किए था तब तक वो बलात्कार के सिलसिले से मुक्त होने का हर रास्ता आज़मा चुकी थी.

पिता ने 14 साल की उम्र में महज़ दस हज़ार रुपए में उसे बेच दिया तो उम्र में कई साल बड़े पति ने कुछ साल बाद जी भर जाने पर छोड़ दिया. दूसरे पति ने दोस्तों से रेप कराया. 20 से ज़्यादा लोगों ने ना सिर्फ उसके शरीर को नोंचा बल्कि तेजाब फेंकने की धमकी भी दी. आज इस लड़की के तीन बच्चे हैं. एक पहले पति से, दूसरा दूसरे पति से और तीसरा उनमें से एक से जिसने रेप किया. तीनों बच्चों को आज दूसरा पति अपने पास रखता है ताकि उनकी मां मजबूरन घर ही लौटे.

अब लड़की का सहारा सिर्फ उसका एक दोस्त है. वो दोस्त आगे आया है. उसे हौसला बंधाता है और खुद भी हौसले से कह रहा है कि मैं अपनी दोस्त के  साथ खड़ा हूं. शादी करने को तैयार हूं. उसका हर दुख बांटने को राजी हूं.. लेकिन सवाल अपनी जगह खड़ा है. उसके जवाब का इंतज़ार अब भी है. क्या इस समाज में कोई लड़की सिर्फ तभी बलात्कार से बची रहेगी जब वो खुद को जला ले?

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