जनरल करियप्‍पा ने क्‍यों की थी संविधान को खत्‍म कर मिलिट्री शासन की वकालत?

करियप्पा का मानना था कि अगर लोगों को लगता है कि राष्ट्रपति शासन और मिलिट्री शासन उन्हें सुरक्षा, बेहतर जीवन और प्रशासन दे सकता है तो इसकी मांग करने का उन्हें अधिकार है.

फील्ड मार्शल केएम करियप्पा, भारतीय सेना के पहले कमांडिंग इन चीफ थे. उन्हें मॉडर्न इंडियन आर्मी की नींव रखने के लिए जाना जाता है. साल 1949 में करियप्पा को भारतीय सेना का पहला आर्मी चीफ बनाया गया था. करियप्पा लोकतंत्र को बचाने के लिए देश में राष्ट्रपति और मिलिट्री शासन लागू करवाना चाहते थे. करियप्पा का मानना था कि भारत में संविधान को खत्म करके मिलिट्री रूल लाना चाहिए.

साल 1971 में इंदिरा गांधी के भारी मतों से जीतने के कुछ हफ्ते बाद ही करियप्पा ने कहा था कि लोकतंत्र को बचाने के लिए भारतीयों को “जागने” और “गति” देने की जरूरत है. करियप्पा का मानना था कि अगर लोगों को लगता है कि राष्ट्रपति शासन और मिलिट्री शासन उन्हें सुरक्षा, बेहतर जीवन और प्रशासन दे सकता है तो इसकी मांग करने का उन्हें अधिकार है. उनका कहना था कि जब नया संविधान बन जाएगा तब राष्ट्रपति शासन हटा लिया जाए और लोकतंत्र स्थापित कर दिया जाए. यह बात उन्‍होंने 10 मार्च, 1970 को धनबाद में पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत में कही थी.

अब आप सोच रहे होंगे कि करियप्‍पा के उस पुराने बयान की हम आज क्‍यों बात कर रहे हैं. दरअसल, ये मामला अब इसलिए चर्चा में आया, क्‍योंकि कर्नाटक के आर्काइव में 7 अप्रैल 1971 का करियप्‍पा के हस्‍ताक्षर वाला एक दस्‍तावेज मिला है. इस नोट में करियप्पा ने अपनी टिप्पणी पर संसद में बहस करने के लिए कहा था. संसद में करियप्पा की इन टिप्पणियों की बहुत आलोचना हुई थी. उस वक्‍त ऐसी खबरें भी आई थीं कि करियप्‍पा ने मिलिट्री रूल वाले बयान के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर माफी मांगी थी, लेकिन करियप्‍पा ने माफी मांगने की उन रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया था. उन्‍होंने कहा था, ‘मैंने जो कहा उससे एक इंच भी पीछे नहीं हटूंगा.’

कर्नाटक के आर्काइव में मिले करियप्‍पा के इस नोट में लिखा है कि तमाम राजनीतिक पार्टियों को खत्म कर दिया जाना चाहिए. राजनीतिक पार्टियां पैसे, समय और ऊर्जा की बर्बादी करती हैं. वो ब्रिटेन में लेबर, लिबरल और कंजर्वेटिव पार्टी की तरह ही भारत में तीन पार्टियां ही चाहते थे.

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