गिरिराज के दांव से कन्हैया कुमार बेगूसराय में चित्त, बिहार में जीत-हार का सबसे बड़ा अंतर!

बेगूसराय का चुनाव बेहद दिलचस्प रहा. पूरा देश एकटक देख रहा था लेकिन गिरिराज सिंह ने बड़ी जीत दर्ज करके करीबी मुकाबले की सारी संभावनाएं ध्वस्त कर दीं.

बिहार की बेगूसराय लोकसभा सीट पर पूरे देश की खास नज़र थी. लग रहा था मुकाबला त्रिकोणीय रहनेवाला है लेकिन ऐसा हुआ नहीं. बीजेपी ने अपने फायरब्रांड नेता गिरिराज सिंह को सीट बदलकर बेगूसराय में उतारा था और उन्होंने साढ़े तीन लाख वोट के अंतर से जीत दर्ज करके पार्टी को मायूस नहीं होने दिया.

उधर पिछली बार इसी लोकसभा सीट से दूसरे नंबर पर रहे तनवरी हसन को आरजेडी ने मैदान में उतारा. चुनाव मज़ेदार तब हुए जब सीपीआई ने कन्हैया कुमार को अपना प्रत्याशी बनाया. कन्हैया जेएनयू प्रकरण के बाद देशभर में चर्चित हुए थे और उनके पक्ष में माहौल बनाने के लिए तमाम मोदी विरोधी चेहरे एकजुट हुए थे.

गिरिराज सिंह ने शुरू में बेगूसराय सीट से चुनाव लड़ने में आनाकानी की थी मगर अब 56 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल करते हुए उन्होंने 5,74,671 वोट बटोर लिए और झंडा गाढ़ दिया. लेफ्ट फ्रंट के संयुक्त उम्मीदवार और सीपीआई के चिन्ह पर लड़ रहे कन्हैया कुमार को 2,23,770 वोट ही मिल सके. आरजेडी के तनवीर हसन तीसरे नंबर पर लुढ़के और एक लाख पैंसठ हजार वोट ही हासिल कर सके.

giriraj, गिरिराज के दांव से कन्हैया कुमार बेगूसराय में चित्त, बिहार में जीत-हार का सबसे बड़ा अंतर!

साल 2014 में क्या था बेगूसराय का रिज़ल्ट
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने ही इस सीट पर बाजी मारी थी लेकिन तब उनके उम्मीदवार भोला सिंह थे.  भोला सिंह ने आरजेडी प्रत्याशी तनवीर हसन को हराया था. डॉ भोला सिंह को तब 4 लाख 28 हजार 227 वोट मिले थे, जबकि हसन को 3 लाख 69 हजार 892 वोट ही मिल सके. सीपीआई प्रत्याशी राजेंद्र प्रसाद सिंह तीसरे नंबर पर रहे थे. उन्हें एक लाख 92 हजार 639 वोट मिले थे.

बेगूसराय में 1952, 1957 और 1962 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के मथुरा प्रसाद मिश्रा को जीत मिली थी. 1967 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के योगेंद्र शर्मा विजयी हुए थे. 1971 में  श्याम नंदन मिश्रा कांग्रेस के टिकट पर और 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर जीते. आगे 1980 और 1984 में कांग्रेस के कृष्णा साही बेसगूसराय से लोकसभा पहुंचे. 1989 में जनता दल के ललित विजय सिंह को लोगों ने जिता कर भेजा. 1991 में कांग्रेस के टिकट से कृष्णा साही विजयी हुए. 1996 में निर्दलीय रामेंद्र कुमार को जनता ने चुना. 1998 में कांग्रेस के राजो सिंह को जीत हासिल हुई. 1999 में आरजेडी के राजवंशी महतो यहां से विजयी रहे. 2004 में जेडीयू के राजीव रंजन सिंह लोकसभा पहुंचे. 2009 में जेडीयू के डॉ. मोनाजिर हसन को जनादेश हासिल हुआ था.